LEDs, Halogen और Laser के अलावा गाड़ियों में इन लाइट्स का होता है इस्तेमाल, जानिए आपके लिए कौन बेहतर
आज हम आपके लिए 5 अलग -अलग प्रकार के हेडलैंप्स की जानकारी लेकर आए हैं। जिसका सबसे अधिक इस्तेमाल वाहन निर्माता कंपनियां करती है।HID या Xenon हेडलैम्प्स ये सीएफएल या कॉम्पैक्ट फ्लोरोसेंट लाइट्स के सामान्य ही है जिसका इस्तेमाल घरों में एलईडी के आने से पहले किया जाता था। आज के समय में कई वाहन निर्माता कंपनियां LEDs लाइट का इस्तेमाल करती है।

नई दिल्ली,ऑटो डेस्क। किसी भी कार में हेडलाइट सबसे अहम भूमिका निभाती है। जिसके कारण आप आराम से कार ड्राइव कर सकते हैं। बिना हेडलाइट आप रात में कार चला ही नहीं सकते हैं। वहीं रात के समय में कार चलाना मुश्किल हो जाता है। आज हम आपके लिए 5 अलग -अलग प्रकार के हेडलैंप्स की जानकारी लेकर आए हैं। जिसका सबसे अधिक इस्तेमाल वाहन निर्माता कंपनियां करती है।
Halogen
आपको बता दें, हैलोजन का इस्तेमाल भारतीय बाजार में सबसे अधिक कारों में किया जाता है। ये सबसे आम प्रकार के इस्तेमाल होने वाले हेडलैम्प्स है। इसको इस्तेमाल करना काफी सरल है। इस लाइट में हैलोजन गैस और टंगस्टन फिलामेंट से भरा ग्लास कैप्सूल है। जब कार चालक इसे ऑन करता है तो बिजली टंगस्टन फिलामेंट से होकर जाती है और फिर हीट जनरेट करती है और बल्ब के अंदर का फिलामेंट चमकने लगता है।
Xenon or HID
HID या Xenon हेडलैम्प्स ये सीएफएल या कॉम्पैक्ट फ्लोरोसेंट लाइट्स के सामान्य ही है जिसका इस्तेमाल घरों में एलईडी के आने से पहले किया जाता था। इसके अंदर फिलामेंट नहीं है। इसके साथ ही HID को आमतौर पर किसी अन्य प्रकार के हेडलैंप के साथ जोड़ा जाता है और उनमें नीली-सफेद लाइट होती है।
LEDs
आज के समय में कई वाहन निर्माता कंपनियां LEDs लाइट का इस्तेमाल करती है। अन्य लाइट के मुकाबले इसका इस्तेमाल काफी सरल है। ये हीट पर निर्भर नहीं रहते और ये काफी ऊर्जा कुशल भी हैं। इसे काफी अलग -अलग डिजाइन में ढाला जाता है।
Matrix or Adaptive LEDs
Matrix or Adaptive LEDs कई अलग-अलग एलईडी होते हैं। इसमें सामने की ओर एक कैमरा लगाया जाता है जिसके कारण सामने से आने वाले वाहनों पर लगातार नजर होती है। जैसे ही सामने से आ रही कार दिखाई देती है। कंप्यूटर एक व्यक्तिगत एलईडी को बंद कर देता है ताकि आने वाला व्यक्ति के आंखों में रोशनी डायरेक्ट न पड़ें।
Laser
लेजर लाइट सबसे महंगी होती है। इसके कारण इसकी कीमत महंगी होती है। आमतौर पर कंपनी इसका इस्तेमाल एक ऑप्शन के तौर पर करती है। लेजर लाइट आगे की सड़क के 600 मीटर तक रोशनी दे सकती है।
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