नई दिल्ली (ऑटो डेस्क)। भारत में ऑटो सेक्टर जिस तेजी से बढ़ रहा है उसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश की खस्ताहाल सड़कों पर आम तौर पर लग्जरी कारें चलती हुई दिखाई देती हैं। करीब एक दशक पहले लग्जरी कारें सड़कों पर काफी कम देखने को मिलती थी, लेकिन अब ऑटो सेक्टर में आ रही वृद्धि के चलते इन लग्जरी कारों के साथ प्रीमियम सेडान, एसयूवी और हैचबैक कारें दिखना आम हो गई हैं, जिसके चलते दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों में घंटों ट्रैफिक लगा रहता है। इसी ट्रैफिक और खस्ताहाल सड़कों के चलते ड्राइविंग के दौरान कारें खराब हो जाती हैं या फिर किसी चूक से दुर्घटनाग्रस्त हो जाती हैं। ऐसे में कारों पर होने वाले इंश्योंरेश में भी तेजी देखने को मिल रही है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भारत में नॉन लाइफ इंश्योरेंश की कुल प्रीमियम का लगभग 45 फीसद मोटर इंश्योरेंश के खाते में जाता है।

मोटर इंश्योरेंस का मतलब उन कारों, दुपहिया वाहनों और कमर्शियल वाहनों से है जो रोड ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के तहत रजिस्टर्ड हैं। ज्यादातर डीलर वाहनों के खरीदारी के वक्त ही इंश्योरेंस कर देते हैं। भारत में करीब 25 नॉन लाइफ इंश्योरेंस कंपनियां हैं, जिनके देशभर में ऑफिस मौजूद हैं और ये सभी मोटर इंश्योरेंस भी बेचती हैं। 3,50,000 एजेंट वाली ये इंश्योरेंस कंपनियां अब ऑनलाइन इंश्योरेंस की सुविधा भी मुहैया करा रही हैं, जिसका लाभ कंपनी की वेबसाइट के जरिए सीधा उठाया जा सकता है। ग्रामीण इलाकों में मोटर इंश्योरेंस वहां मौजूद कॉमन सर्विस सेंटर्स के जरिए किया जाता है।

इस त्योहारी सीजन अगर आप भी नई बाइक या कार खरीदने जा रहे हैं या फिर आप अपने वाहन के इंश्योरेंश को रिन्यू कराना चाहते हैं तो आप ये तीन अहम ऑप्शन्स को आजमा सकते हैं।

1. थर्ड पार्टी इंश्योरेंस

मोटर वाहन कानून के अंतर्गत थर्ड पार्टी बीमा का प्रावधान किया गया है। इसे थर्ड पार्टी लायबिलिटी कवर के नाम से भी जाना जाता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि यह तीसरे पक्ष के बीमा से संबंधित है। जब वाहन से कोई दुर्घटना होती है तो कई बार इसमें बीमा कराने वाला व बीमा कंपनी के अलावा एक तीसरा पक्ष भी होता है, जो प्रभावित होता है। यह प्रावधान इस तीसरे पक्ष यानी थर्ड पार्टी के दायित्वों को पूरा करने को लेकर है। यह पॉलिसी बीमा कराने वाले को नहीं, बल्कि जो तीसरा पक्ष प्रभावित होता है, उसे कवरेज देती है। दुर्घटना में तीसरे पक्ष की मृत्यु होने या उसके घायल होने की स्थिति में मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है। इसे कानूनी तौर पर अनिवार्य बना दिया गया है।

2. कॉन्प्रेहेन्सिव इंश्योरेंस कवर

इस पॉलिसी के तहत वाहन क्षतिग्रस्त होने के साथ ही एक्सीडेंट में चोटिल या घायल होने वाला तीसरे पक्ष के प्रति जिम्मेदारी कवर करता है। इतना ही नहीं, इसमें बीमा कराने वाले के वाहन का इंश्योरेंस भी शामिल होता है, जिसमें ऐक्सिडेंट, आग, चोरी, प्राकृतिक आपदा या आतंकवाद की चपेट में आने वाले वाहनों को इंश्योरेंस कवर मिलता है।

3. जीरो डेप्रिसिएशन इंश्योरेंस कवर

इस इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत वाहन की वैल्यू तय करने में डेप्रिसिएशन को शामिल नहीं किया जाता। यानी अगर किसी हादसे के चलते या अन्य वजह से आपकी गाड़ी को नुकसान पहुचंता है तो बीमा कंपनी दावे के अुनसार पूरी रकम का भुगतान करती है। बता दें, जीरो डेप्रिसिएशन का प्रीमिमय सामान्य कार बीमा से करीब 20 फीसद महंगा हो सकता है।

कैसे करें इंश्योरेंस क्लेम?

  • मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत थर्ड पार्टी क्लेस या फिर ऑन डैमेज क्लेम होते हैं। इस पॉलिसी के तहत अगर आपके वाहन का एक्सीडेंट हो जाता है या फिर कोई अन्य व्यक्ति इसमें घायल या उसके वाहन को नुकसान होता है तो यह थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कवर में कवर होता है।
  • ऑन डैमेज क्लेम में सिर्फ आपके वाहन का ही डैमेज कवर शामिल होता है। एक्सीडेंट के दौरान अगर आपको या फिर आपके वाहन को कोई नुकसान पहुंचता है तो आपको बीमा कंपनी और पुलिस को एक्सीडेंट की जानकारी देनी होती है। बता दें, ग्राहक इंश्योरेंस को कई माध्यम के जरिए क्लेम कर सकते हैं। इसमें इंश्योरेंस करने वाली कंपनी के कस्टमर कॉन्टैक्ट सेंटर, मैसेज या उसकी वेबसाइट के जरिए क्लेम के लिए अप्लाई किया जा सकता है।
  • अगर आपकी गाड़ी ज्यादा बुरी तरीके से क्षतिग्रस्त है तो इंश्योरेंस कंपनी की ओर से नियुक्त किया जाने वाला सर्वेयर इसका सर्वे करने आएगा और फिर इसे वर्कशॉप के एस्टिमेट के हिसाब से तैयार किया जाएगा। कम क्षतिग्रस्त वाले मामलों में इंश्योरेंस कंपनियों के ऑफिशियल भी चेक कर सकते हैं। इसके अलावा कई इंश्योरेंस कंपनियों के वर्कशॉप्स से टाईअप होते हैं जहां आप अपने क्षतिग्रस्त वाहन को कैशलेस भी बनवा सकते हैं।

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Posted By: Ankit Dubey