नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। प्रत्येक वाहन मालिकों को गाड़ी चलाते समय पीयूसी सर्टिफिकेट रखना अनिवार्य है। मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार नियमों का उल्लंघन करने वालों को 10 हजार रुपये तक का फाइन भरना पड़ेगा। इस खबर में आपको बताने जा रहे हैं कैसे बनता है पीयूसी प्रमाणपत्र और इसको लेकर नियमों के बारे में।

कैसे बनता है पीयूसी सर्टिफिकेट

प्रदूषण की जांच के लिए एक गैस एनालाइजर को एक ऐसे कंप्यूटर से जोड़ा जाता है जिसमें कैमरा और प्रिंटर भी जुड़ा हो। यह गैस एनालाइजर गाड़ी से निकलने वाले प्रदूषण के आंकड़ों की जांच करता है और इसे कंप्यूटर को भेजता है। जबकि कैमरा गाड़ी के लाइसेंस प्लेट की फोटो लेता है। अगर गाड़ी से निश्चित दायरे के अंदर प्रदूषण निकल रहा हो, तो पीयूसी सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है, वहीं अगर निश्चित दायरे के बाहर गाड़ी का धुंआ निकलता पाया जाता है तो सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाता है।

कैसे बनवाएं पीयूसी सर्टिफिकेट

पीयूसी सर्टिफिकेट बनवाना बेहद आसान है। इसके लिए आपको कुछ चिन्हिंत पेट्रोल पंप पर जाना होगा, जहां 60-100 रुपये का शुल्क जमा करके अपने गाड़ी का प्रदूषण चेक करवा कर सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकते हैं।

बिना पीयूसी सर्टिफिकेट वाले वाहन मालिकों का इतने का कटता है चालान

केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के अनुसार, प्रत्येक मोटर वाहन (बीएस-I/बीएस-II/बीएस-III/बीएस-IV के साथ-साथ सीएनजी/एलपीजी पर चलने वाले वाहनों सहित) के लिए एक वैध पीयूसी प्रमाणपत्र होना आवश्यक है। अगर कोई व्यक्ति बिना पीयूसी प्रमाणपत्र के वाहन चलाते पकड़ा जाता है तो उसे 10 हजार रुपये तक का भारी भरकम चालान का सामना करना पड़ सकता है।

PUC सर्टिफिकेट क्यों लाया गया

प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र एक अप्रूवल है कि आपके वाहन से निकलने वाली इमेशन नियंत्रण में है या नहीं। इस प्रमाण पत्र का उद्देय वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण को कंट्रोल में करने का है। यह सर्टिफिकेट इमेशन स्तरों के गहन सत्यापन के बाद सरकार द्वारा जारी किया गया एक आधिकारिक दस्तावेज है।

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Edited By: Atul Yadav

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