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    महंगे पेट्रोल की तुलना में सस्ती डीजल कारें कैसे देती हैं ज्यादा माइलेज? यहां समझें पूरी तकनीक

    By Sarveshwar PathakEdited By:
    Updated: Mon, 14 Mar 2022 07:48 AM (IST)

    ग्राहक गाड़ी खरीदते समय ये जरूर चेक करता है कि कौन सी कार ज्यादा माइलेज देगी? लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पेट्रोल की तुलना में डीजल कारें कैसे ज्यादा माइलेज देती हैं। अगर नहीं तो आइए आपको आज समझाते हैं कि आखिर इसके पीछे क्या गणित होती है।

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    महंगे पेट्रोल की तुलना में सस्ती डीजल कार कैसे देती हैं ज्यादा माइलेज

    नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। आखिर माइलेज देने वाली गाड़ी किसे पसंद नहीं होती है? पेट्रोल और डीजल कार में हम अक्सर कंफ्यूज हो जाते हैं कि कौन सी कार खरीदना चाहिए? लेकिन क्या आपको पता है कि पेट्रोल कार के मुकाबले डीजल कारें ज्यादा माइलेज देती हैं। जी हां! डीजल कार पेट्रोल की तुलना में ज्यादा माइलेज देती हैं। आखिर इसके पीछे क्या गणित होती है? एक उदाहरण के तौर पर मान लीजिए कि हम हुंडई ग्रैंड i10 Nios डीजल और पेट्रोल के दोनों वेरिएंट्स को लेते हैं, तो डीजल वर्जन वाली कार में आपको प्रति लीटर 26.2km का माइलेज मिलता है। वहीं, अगर हम हुंडई ग्रैंड i10 Nios पेट्रोल कार की बात करें तो कंपनी पेट्रोल वर्जन के लिए प्रति लीटर 20.7km माइलेज देने का दावा करती है। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये कैसे संभव होता है, जबकि डीजल की पेट्रोल की तुलना में ज्यादा महंगा है, फिर भी डीजल वाली कार ही क्यों ज्यादा माइलेज दे रही है। जी हां, नीचे आप इसकी गणित समझ लीजिए, फिर सब क्लियर हो जाएगा।

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    समझिए पेट्रोल और डीजल के ऊर्जा की गणित

    आपको बता दें कि एक फ्यूल के रूप में डीजल में ज्यादा पावर होती है। इसके पीछे का गणित ये है कि डीजल में प्रति लीटर 38.6 मेगा जूल्स उर्जा होती है। वहीं, एक लीटर पेट्रोल में केवल 34.8 मेगा जूल्स ऊर्जा मिलती है। अब आप सोच रहे होंगे कि ये मेगा जूल्स क्या है? आपको बता दें कि मेगा जूल्स ऊर्जा को मापने की एक यूनिट है।

    कैसे काम करता है डीजल इंजन 

    क्या आपको पता है कि पेट्रोल डीजल से ज्यादा ज्वलनशील है। पेट्रोल की तरह डीजल ज्वलनशील नहीं होता, जिसके कारण वह ज्यादा देर तक चलता है। डीजल इंजन के सिलेंडर में हाई रेशियो में एयर कंप्रेश होता है। ये रेशियो करीब 18:1 या 21:1 का होता है। एयर को कंप्रेश किए जाने से हीट पैदा होती है। इस तरह से जब सिलेंडर के अंदर का तापमान 210 डिग्री सेंटीग्रेट से ऊपर हो जाता है, तो सिलेंडर में बहुत ही कम मात्रा में डीजल स्प्रे होता है, जिसके बाद इंजन में इग्निशन पैदा होता है। आपने देखा होगा कि ठंड के महीनों में डीजल इंजन वाली गाड़ियों को स्टार्ट करने में काफी समस्या होती है, क्योंकि इसमें ऊपर बताया प्रॉसेस नहीं हो पाता है।

    डीजल की तुलना में पेट्रोल है अधिक ज्वलनशील

    पेट्रोल की तुलना में डीजल की कम खपत होती है, क्योंकि डीजल इंजन में सिलेंडर में इंधन को स्प्रे किया जाता है, जिसके वजह से डीजल की बर्निंग कैपसिटी बेहतर होती है। यह पेट्रोल की तुलना में लंबे समय तक बर्न होता रहता है। इसके चलते डीजल इंजन उच्च आरपीएम रेंज तक नहीं पहुंच पाता है।

    हुंडई की सोनेटा पेट्रोल में है यूज हुई स्प्रे तकनीकी

    आपको बता दें कि इसको अब पेट्रोल इंजन की गाड़ियों के लिए भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण है हुंडई की सोनेटा गाड़ी, जिसमें पेट्रोल इंजन में यही स्प्रे तकनीक अपनाई गई है और यही कारण है कि यह कार शानदार माइलेज देती है।