नई दिल्ली [जेएनएन]। लखनऊ का एक परिवार अपनी बेटी को डॉक्टर बनाना चाहता था। बेटी ने भी अपने माता पिता के सपने को पूरा करने का प्रण लिया था। इसके लिए उसने दिन रात पढ़ाई की और मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए पीएमटी की परीक्षा भी पास कर ली। लेकिन वह एक साल पूर्व अपने एक परिचित युवक के बहकावे में आकर विजय विहार स्थित वीरेंद्र देव दीक्षित के आध्यात्मिक विश्वविद्यालय पहुंच गई। इसके बाद उस पर बाबा की मुरली का ऐसा असर हुआ कि वह अपने माता-पिता तक को भूल चुकी है और अपने घर जाने को तैयार नहीं है।

निराश हुए परिजन 

इस युवती के परिजन रविवार को लखनऊ से विजय विहार स्थित बाबा के आश्रम में पहुंचे थे। परिजन उसे पिछले एक साल से अपने साथ ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। यहां कई बार पहले भी आ चुके हैं। लेकिन अब जब बाबा के कारनामों के बारे में दुनिया को पता चला है तो उसके परिजनों को यह उम्मीद जगी थी कि इस बार युवती उनके साथ जाने को राजी हो जाएगी। लेकिन इस बार भी उन्हें निराशा हाथ लगी।

बेटी से साथ जाने से मना कर दिया

युवती की मां ने बताया कि उसे काफी कोशिशों के बाद आश्रम के अंदर ले जाकर बेटी से मिलवाया गया। उस वक्त वहां आश्रम की कई महिलाएं भी मौजूद थीं। वह अपनी बेटी से अकेले में बात करना चाहती थीं। लेकिन ऐसा नहीं होने दिया गया। बेटी से साथ जाने से मना कर दिया।

सभी सपने टूटने लगे हैं

वह कहती हैं कि सपना था कि बेटी एक अच्छी डॉक्टर बनकर परिवार का नाम रोशन करेगी। गरीबों की मदद करेगी। मसीहा बनेगी। लेकिन सभी सपने टूटने लगे हैं। आश्रम के संचालकों ने उनकी बेटी को अपने काबू में कर लिया है। एक साल पहले तक जो लड़की परिवार के बिना एक दिन भी नहीं रह सकती थी। आज उस लड़की को परिवार की याद तक नहीं आती है।

जन्म दिन मनाने के बहाने गायब हो गई थी युवती

युवती की मां ने बताया कि 9 मई को 2016 को वह घर से दोस्तों के संग जन्मदिन मनाने की बात कह कर निकली थी। इसके बाद वापस नहीं लौटी। बाद में पता चला कि वह दिल्ली के आश्रम में है। उन्होंने बताया कि दूर के एक रिश्तेदार ने ही उनकी बेटी को वीरेंद्र देव दीक्षित के बारे में बताया था। कई बार बाबा के सत्संग में वह लड़का मेरी लड़की को लेकर गया था। धीरे-धीरे उसके बहकावे में आकर युवती आश्रम में पहुंच गई। लेकिन वह हर कीमत पर अपनी बेटी को अपने साथ ले जाना चाहती हैं। आश्रम के अंदर बेटी के रहने से उनके मन में कई तरह की आशंका, चिंता सता रही हैं। 

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Posted By: Amit Mishra