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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 22, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

ओलंपिक में पहाड़ की बेटी दिखाएगी हुनर

By sunil negiEdited By:
Published: Sat, 22 Oct 2016 04:22 PM (IST)Updated: Sun, 23 Oct 2016 03:00 AM (IST)

नैनीताल मानसून मैराथन जीतने वाली पूनम राणा को एसएसबी ने न केवल गोद लिया बल्कि उसकी दृढ़ इच्छाशक्ति को परखते ...और पढ़ें

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गरमपानी, [मनीष साह]: कहते हैं हौसले बुलंद व कुछ कर गुजरने का जुनून हो तो मंजिल मिल ही जाती है। नैनीताल मानसून मैराथन जीतने वाली पहाड़ की बेटी पूनम राणा की धुन भी कुछ ऐसी ही रही। उसका जज्बा ही है कि उसे मंजिल तक पहुंचाने के लिए सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने न केवल गोद लिया बल्कि उसकी दृढ़ इच्छाशक्ति को परखते हुए ओलंपिक खेलों में पदक जीतने के लिए तैयार करने का मन बनाया है।

सुदूर सतखोल गांव, मुक्तेश्वर निवासी पूनम राणा को एसएसबी ने अपने साहसिक साइकिल यात्र अभियान से जोड़ा है। 18 वर्षीय पूनम ने अगस्त 2016 में नैनीताल मानसून मैराथन में साइक्लिंग प्रतियोगिता में चैंपियनशिप जीती थी। उसकी मेहनत, साइक्लिंग के प्रति जुनून तथा देश के लिए पदक जीतने की धुन ही है कि एसएसबी ने इस बेटी को गोद ले लिया है।

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नाभिढांग से ‘स्वच्छ भारत व बेटी पढ़ाओ बेटी बढ़ाओ’ की थीम पर शुरू साहसिक साइकिल यात्र में उसे साथ लिया है। टीम लीडर कमांडेंट राजेश ठाकुर कहते हैं कि पूनम को एसएसबी ओलंपिक के तैयार कर रहा है।

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भारतीय सेना में रहे ध्यान सिंह व गृहणी माता कुंती देवी की पुत्री पूनम कहती हैं कि अपने देश की बेटियों में क्षमता कम नहीं है। जरूरत है बस प्रोत्साहन की। पूनम का एक भाई सेना में है। दूसरा पढ़ाई कर रहा है। पूनम का कहना है कि देश के लिए मैडल जीतना ही उनका प्रथम लक्ष्य है और इसे वह पाकर ही दम लेंगी।

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