यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 20, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सात राज्यों में मौसम का उत्तराखंडी मॉडल
उत्तराखंड ने मौसम के पूर्वानुमान के मामले में अपनी विशिष्ट पहचान बनाकर मौसम को आमजन से जोड़ा है। ‘इंपैक्ट बेस्ड ...और पढ़ें

केदार दत्त, देहरादून। उत्तराखंड ने मौसम के पूर्वानुमान के मामले में अपनी विशिष्ट पहचान बनाकर मौसम को आमजन से जोड़ा है। ‘इंपैक्ट बेस्ड फोरकास्ट’ का मॉडल अपनाते हुए मौसम विभाग ने बेंचमार्क स्थापित किया। अब इस मॉडल को उत्तर भारत के सात अन्य राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में भी अपनाया जाएगा। यह कहना है मौसम विभाग के उप महानिदेशक डॉ. आनंद शर्मा का।
देहरादून पहुंचे डॉ. शर्मा ने ‘दैनिक जागरण’ से खास मुलाकात में कहा कि उत्तर भारत में उत्तराखंड समेत सभी आठ राज्यों में शासन-प्रशासन और मौसम विभाग के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर मौसम को आमजन से जोड़ा जाएगा।
हाईवे पर भी मौसम का हाल
कोशिशें रंग लाईं तो हाईवे पर मौसम के मिजाज की जानकारी मिल सकेगी। मसलन, कब किस राजमार्ग पर कोहरा है, कहां पाला है और कहां भारी वर्षा के आसार हैं, ऐसी जानकारियां एफएम रेडियो के जरिये मिल सकेंगी। मौसम विभाग के डीडीजी डॉ. शर्मा बताते हैं कि इस मसले पर गंभीरता से विचार चल रहा है।
शहरों के छोटे हिस्सों का भी पूर्वानुमान
मौसम के त्वरित पूर्वानुमान के मद्देनजर राज्यों में रडार लगाने की प्रक्रिया चल रही है। डॉ. शर्मा बताते हैं कि रडार लगने पर मौसम का सटीक पूर्वानुमान तो मिलेगा ही, शहरों के छोटे-छोटे हिस्सों के पूर्वानुमान की जानकारी भी दी जा सकेगी। मसलन, देहरादून में रडार लगने पर इसके अलग-अलग क्षेत्रों में मौसम के रंग की चंद घंटे पहले जानकारी दी जा सकेगी। इसे एफएम पर भी दिया जाएगा।
सेंटर फॉर एक्सीलेंसी माउंटेन मीटियोलॉजी
डॉ. शर्मा ने कहा कि पर्वतीय इलाकों खासकर उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम का पूर्वानुमान बड़ी चुनौती है। इसे देखते हुए जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर माउंटेन मीटियोलॉजी को अन्य क्षेत्रों में भी अपनाया जाएगा। इस कड़ी में सेंटर फॉर एक्सीलेंसी माउंटेन मीटियोलॉजी बनाने का प्रयास किया जाएगा।
एफएम पर हो विशेष फोकस
उप महानिदेशक का मानना है कि पर्वतीय व मैदानी दोनों ही तरह के भूगोल वाले राज्यों में कोई भी जानकारी आमजन तक पहुंचाने में एमएम रेडियो का अहम रोल है। मौसम की जानकारी लोगों तक पहुंचाने में इसका बेहतर उपयोग हो सकता है। कई इलाकों में हो भी रहा है। लिहाजा, सरकारों के साथ ही नामी कंपनियों, संस्थाओं को इस दिशा में पहल करनी चाहिए।
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