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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 06, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सूतकः आज सुबह 10.31 से दोपहर 1.52 बजे तक बांधें रक्षा सूत्र

By Nawal MishraEdited By:
Published: Sun, 06 Aug 2017 07:47 PM (IST)Updated: Sun, 06 Aug 2017 10:59 PM (IST)

रक्षाबंधन पर भाइयों की कलाई पर राखी सजाने के लिए तीन घंटे 21 मिनट का समय मिलेगा। रक्षा सूत्र सुबह 10.31 से दोपहर 1.52 बजे के बीच बांधा जाएगा।

सूतकः आज सुबह 10.31 से दोपहर 1.52 बजे तक बांधें रक्षा सूत्र
सूतकः आज सुबह 10.31 से दोपहर 1.52 बजे तक बांधें रक्षा सूत्र

वाराणसी (जेएनएन)। इस बार सावन के अंतिम सोमवार को पडऩे वाले रक्षाबंधन पर बहनों को भाइयों की कलाई पर राखी सजाने के लिए तीन घंटे 21 मिनट का समय मिलेगा। रक्षा सूत्र सुबह 10.31 से दोपहर 1.52 बजे के बीच ही बांधा जाएगा। इसके बाद खंडग्रास चंद्रग्रहण लगेगा। उस काल में राखी नहीं बांधी जा सकती। 

प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित ऋषि द्विवेदी बताते हैं कि शास्त्र के अनुसार सोमवार को सुबह 10.30 बजे भद्रा की समाप्ति हो रही है। इसके बाद शुभ समय की शुरुआत होगी। ऐसे में बहनें सुबह 10.31 बजे से राखियां बांधना शुरू कर दें। यह शुभ समय अनवरत दोपहर 1.52 बजे तक मिलेगा। इसके बाद राखी बांधना शुभ नहीं होगा। इस बार रक्षाबंधन पर खंडग्रास चंद्रग्रहण श्रावण नक्षत्र मकर राशि पर पड़ रहा है जो रात्रि में 10 बजकर 53 मिनट से प्रारंभ होकर 12.48 तक मुख्यत: रहेगा। ऐसे में धर्मशास्त्र के अनुसार चंद्रग्रहण से नौ घंटे पूर्व व सूर्यग्रहण से 12 घंटे पूर्व सूतक होता है। लिहाजा सात अगस्त को दोपहर 1.53 बजे से चंद्रग्रहण का सूतक काल शुरू हो जाएगा अत: उसके बाद राखी बांधना श्रेयस्कर नहीं है। 

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भद्रा में रक्षा पर्व मनाना है वर्जित 

सनातन धर्मियों के प्रमुख पर्वों में से रक्षाबंधन का अपना विशेष महत्व है जो श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस पर्व को श्रावणी रक्षाबंधन भी कहते हैं। हर बार श्रावण पूर्णिमा को भद्रा के उपरांत ही रक्षा पर्व मनाया जाता है। शास्त्र के अनुसार भ्रदा में रक्षा पर्व और फाल्गुनी दोनों वर्जित है क्योंकि श्रावणी से राजा को और फाल्गुनी से प्रजा को नुकसान पहुंचता है। इस बार श्रावण पूर्णिमा सात अगस्त को पड़ रही है। पूर्णिमा तिथि छह अगस्त को रात्रि 9.56 बजे से लगकर सात अगस्त को रात्रि 11.02 बजे तक रहेगी। वहीं भद्रा सात अगस्त को दिन में साढ़े दस तक है। इसके बाद रक्षाबंधन मनाया जाएगा। 

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साढ़े छह घंटे पहले बंद होगा बाबा विश्वनाथ मंदिर का कपाट 

रक्षाबंधन पर खंडग्रास चंद्रग्रहण के चलते बाबा विश्वनाथ के दरबार में दोपहर एक बजकर 52 मिनट से विग्रह स्पर्श पर पूरी तरह से रोक होगी। इस दौरान श्रद्धालु गर्भगृह के बाहर ही रहेंगे। वहीं सप्तर्षि आरती अपराह्न 2.30 बजे से लेकर 3.30 बजे के बीच संपन्न होगी। इसके बाद झूलनोत्सव शृंगार व भोग आरती करने के बाद शाम 4.30 बजे ही मंदिर का कपाट दर्शनार्थियों के लिए बंद हो जाएगा। सामान्य दिनों में मंदिर का कपाट रात्रि 11 बजे बंद होता है। ऐसे में रक्षाबंधन पर साढ़े छह घंटे पहले ही बाबा का कपाट बंद हो जाएगा। ग्रहण की समाप्ति के बाद 12.48 बजे अर्चक द्वारा मोक्ष पूजा की जाएगी। इसके बाद कपाट पुन: बंद कर दिया जाएगा। अगले दिन यानी आठ अगस्त को नियमित समय के मुताबिक मंगला आरती संपन्न करने के बाद भोर में चार बजे मंदिर का कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएगा।