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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 25, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

BHU को सुलगाने के लिए हुई थी फंडिंग, जानिए-आंदोलन के पीछे कौन था साजिशकर्ता

By Ashish MishraEdited By:
Published: Mon, 25 Sep 2017 09:08 PM (IST)Updated: Tue, 26 Sep 2017 08:01 AM (IST)

बीएचयू के धरना-प्रदर्शन को राजनीतिक दलों और नकारात्मक गुट के लोगों ने हाइजैक कर लिया था। इस मामले को पीएम ...और पढ़ें

BHU को सुलगाने के लिए हुई थी फंडिंग, जानिए-आंदोलन के पीछे कौन था साजिशकर्ता
BHU को सुलगाने के लिए हुई थी फंडिंग, जानिए-आंदोलन के पीछे कौन था साजिशकर्ता

वाराणसी (जेएनएन)। बीएचयू परिसर में छात्राओं के साथ हुई छेड़खानी के विरोध में शुरू हुए उनके धरना-प्रदर्शन को कुछ ही घंटे बाद राजनीतिक दलों और नकारात्मक गुट के लोगों ने हाइजैक कर लिया था। इतना ही नहीं, इस मामले को पीएम के दौरे के दरम्यान ही बड़ा बनाने की भी पूरी तैयारी कर ली गई थी। खुफिया रिपोर्ट के अनुसार जेएनयू प्रकरण के तौर पर बीएचयू को सुलगाने में जुटे लोगों को विश्वविद्यालय प्रशासन के अडिय़ल व लापरवाह रवैये से खूब मौका मिला और वे अपने मंसूबे में कामयाब हो गए। अंतत: छेड़खानी का मसला पीछे छूट गया और बीएचयू एक बवाली परिसर के रूप में राष्ट्रीय फलक पर बदनाम कर दिया गया।


बीएचयू मामले को खुफिया विभाग ने 'फैब्रिकेटेड करार दिया है। पूरे मामले को बड़ा बनाने के लिए बीएचयू प्रशासन को भी दोषी माना गया है। खुफिया सूत्रों के अनुसार 21 सितंबर की शाम भारत कला भवन के पास जब छात्रा से छेड़खानी हुई तो सबसे पहले समीप मौजूद बीएचयू के सुरक्षाकर्मियों ने बेतुके बोल बोलते हुए व्यथित किया। बाद में प्रॉक्टोरियल बोर्ड में छात्रा ने लिखित शिकायत की तो उसे लंका थाने को फारवर्ड करने के बजाय रातभर दबाए रखा गया।

22 सितंबर की सुबह जब छात्राएं बीएचयू गेट पर धरने पर बैठ गईं तब जाकर शिकायत थाने पहुंचाई गई और पुलिस ने छेड़खानी का मुकदमा दर्ज किया। उधर, सुबह से ही बीएचयू के कुलपति को बुलाने की मांग छात्राएं कर रही थीं, लेकिन वह नहीं गए। शाम को पीएम को लंका होकर मानस मंदिर जाना था, लेकिन बीएचयू और जिला प्रशासन ने 'इंटरनल और आउटर मामला बताते हुए गेंद एक-दूसरे के पाले में फेंकना शुरू कर दिया।

फंडिंग से लेकर खाने-पीने की व्यवस्था भी की गई थी
खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक सुबह का धरना कुछ ही घंटे बाद बाहरी तत्वों और राजनीतिक दलों द्वारा संभाल लिया गया। इसमें वामपंथियों सहित अवसर की ताक में जुटे कांग्रेसी और एनएसयूआइ के लोग शामिल थे। इतना ही नहीं बीएचयू परिसर को लेकर नकारात्मक भाव रखने वालों से लेकर अन्य ने बाकायदा फंडिंग करते हुए खाने-पीने की व्यवस्था के साथ बैनर-पोस्टर लगाए। इसी में से एक बड़ा पोस्टर लहुराबीर में लगाया गया, जिसके शब्द बेहद असंसदीय थे। रिपोर्ट के मुताबिक छात्र आंदोलन को हवा देने वाले स्लीपिंग माड्यूल में इलाहाबाद, हैदराबाद, कोलकाता, दिल्ली से लोग छात्र-छात्राओं की शक्ल में आए थे।

कमिश्नर-एडीजी ने की सुनवाई
शासन के निर्देश पर सोमवार को कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण व एडीजी बी महापात्र ने बीएचयू प्रकरण पर कमिश्नरी में सुनवाई की। इसमें 15 लोगों ने लिखित और 12 लोगों ने टेलीफोनिक तौर पर शिकायत करते हुए साक्ष्य उपलब्ध कराए।

सपाइयों का हंगामा, गिरफ्तार
लाठीचार्ज की जांच के लिए समाजवादी पार्टी की ओर से नौ सदस्यीय दल गठित किया गया था। सोमवार को यह दल सैकड़ों सपाइयों के साथ दोपहर में बीएचयू में दाखिल होने लगा तो वहां मौजूद फोर्स के साथ काफी धक्कामुक्की हुई। अंतत: 114 सपाइयों को गिरफ्तार किया गया।

तीस्ता सीतलवाड़ भी गिरफ्तार
सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को भी दोपहर में पुलिस लाइन के समीप पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, उन्होंने कहा कि वे बीएचयू नहीं जा रही थीं, बल्कि एक दूसरे कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बनारस आई थीं।

विरोधियों को मिला मौका : अमर सिंह
मीरजापुर में मां विंध्यवासिनी का दर्शन कर लौटते समय राज्यसभा सांसद अमर सिंह ने वाराणसी एयरपोर्ट पर कहा कि बीएचयू का मामला विरोधियों को एक मौके की तरह मिल गया है, जिसके चलते वे प्रधानमंत्री को बदनाम करने जुट गए हैं। छात्राओं से छेड़खानी निंदनीय है और इसके लिए दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

परिसर में हुआ धरना
बीएचयू में हुए बवाल के तीसरे दिन भी एबीवीपी का धरना छेड़खानी वाले स्थल पर जारी है। उधर, बिड़ला छात्रावास के सामने छात्रों ने धरना दिया कि उन्हें भी शांति मार्च निकालने का मौका दिया जाए।