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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 13, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

ठंड लगने से मासूम की मौत

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Published: Sat, 13 Dec 2014 01:04 AM (IST)

उन्नाव, जागरण संवाददाता: ठंड से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त है। जिला अस्पताल में भर्ती रोगी और तीमारदार भ

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उन्नाव, जागरण संवाददाता: ठंड से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त है। जिला अस्पताल में भर्ती रोगी और तीमारदार भी ठंड से दो-चार हो रहे हैं। रोगियों को ठंड से बचाव करने के लिए निजी तौर पर कंबल और रजाई का सहारा लेना पड़ रहा है। उधर तीमारदारों को रात बरामदे में शीतलहर के थपेड़े सहते रहकर काटनी पड़ रही है। कहने को यहां रैनबसेरा है लेकिन तीमारदारों को भी इसका लाभ नहीं मिल रहा है। ठंड लगने से बुखार आने के बाद जिला अस्पताल लाए गए एक तीन वर्षीय बच्चे की शुक्रवार को मौत हो गई। इस तरह गत तीन दिनों के अंदर ठंड से मरने वालों की संख्या बढ़कर चार हो गई है।

थाना अचलगंज के गांव काटी के रहने वाले एक तीन वर्षीय बच्चे अर्जुन को ठंड लग गई, इसके चलते उसे तेज बुखार आ गया। ऐसे में उसके परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल आए जहां डाक्टर ने से देखने के बाद मृत घोषित कर दिया। इसके पहले भी ठंड से तीन लोगों की जान जा चुकी है। लापरवाही का आलम यह है कि उमाशंकर दीक्षित संयुक्त जिला अस्पताल में रोगियों को मात्र एक-एक कंबल दिया जा रहा है। एक कंबल के सहारे गलन भरी रात गुजारने में रोगी ठीक होने के बजाया नई बीमारी को गले लगा रहे हैं। इससे मजबूर होकर रोगियों को अपने घरों से रजाई और कंबल मंगाकर ठंड से बचाव करना पड़ रहा है। यह हाल पुरुष और महिला दोनों की अस्पतालों का है कहीं भी अभी तक रोगियों को दो कंबल नहीं दिए जा रहे हैं। जबकि नियमानुसार सर्दी में रोगियों को दो कंबल दिए जाने चाहिए। वार्डो में इतनी ठंड है कि दिन में भी रोगियों को रजाई और निजी कंबलों का सहारा लेना पड़ा है। वहीं वार्ड में ड्यूटी कर रहे एक स्वास्थ्य कर्मी ने कहा कि अभी दो कंबल देने का कोई आदेश नहीं मिला है और न ही अतिरिक्त कंबल ही मिले हैं। उसने बताय कि रोगियों के साथ स्वास्थ्य कर्मियों को भी ठंड में सिकुड़ते रहकर रात ड्यूटी करनी पड़ रही है।

जिला अस्पताल में एक रैन बसेरा

जिला अस्पताल परिसर में मात्र एक रैनबसेरा बना है। जबकि उसमें अस्पताल परिसर में भवन निर्माण का काम करने वाले श्रमिकों का डेरा है। यहां भी तीमारदारों को कोई ऐसी सुविधा हासिल नहीं है जिससे वह ठंड से बचाव कर सके। कमोवेश यही हाल ब्लाक स्तरीय सीएचसी और पीएचसी का भी है। यहां भी रोगियों और तीमारदारों को ठंड से बचाव का कोई प्रबंध नहीं है।

क्या बोलीं जिम्मेदार

जिले के सभी सीएचसी और पीएचसी प्रभारियों को निर्देश दिया है कि रोगियों को दो-दो कंबल दिए जाएं। -डॉ. गीता यादव, मुख्य चिकित्साधिकारी, उन्नाव।