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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 19, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

ठंड ने दो महिलाओं की ली जान

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Published: Sun, 19 Jan 2014 08:25 PM (IST)Updated: Sun, 19 Jan 2014 08:26 PM (IST)

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उन्नाव, जागरण संवाददाता: शीतलहर का कहर लगातार जारी है। ठंड से मौतों का सिलसिला भी थम नहीं रहा है। रविवार को ठंड लगने के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराए गए आधा दर्जन रोगियों में दो महिलाओं की मौत हो गई।

एक पखवारे से ठंड का कहर लगातार जारी है। पिछले तीन दिनों में हुई बरसात और ओलावृष्टि से आम जनजीवन ठिठुर कर रह गया है। जिला अस्पताल में शनिवार शाम से लेकर रविवार को मध्याह्न दो बजे तक ठंड लगने से बीमार होकर आए 13 रोगियों को भर्ती कराया गया था। इनमें लक्ष्मी (40) पत्‍‌नी ज्ञानेंद्र अवस्थी निवासिनी जवाहर नगर को शनिवार रात अचानक कंपकपी लगी और वह बेहोश होकर गिर गई। परिजन उसे जिला अस्पताल लाए। डाक्टर ने ठंड लगने के तहत उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया जहां उसकी मौत हो गई। इसी तरह बांगरमऊ कोतवाली के नौनिहालगंज निवासी मीनू गुप्ता की पत्‍‌नी सरोज गुप्ता (42) को शनिवार रात ठंड लगने से बेहोश होने के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रविवार को भोर पहर सरोज की मौत हो गई। ठंड लगने से झटका आने और कोल्ड डायरिया के शिकार होकर आए 11 रोगियों का उपचार चल रहा है। इनमें बुजुर्ग और बच्चों की संख्या अधिक है।

जनवरी में हुई ठंड से मौतें

1 जनवरी आशा देवी (35)

2 जनवरी जीतेंद्र (20)

3 जनवरी गुड़िया (21)

6 जनवरी नगमा (08)

11 जनवरी ऊषा (45)

14 जनवरी कुसमा (40)

17 जनवरी रोहतम (60)

कालिका (55)

18 जनवरी अहमद हसन (55)

श्याम बिहारी (60)

राम कुमार (14)

19 जनवरी सरोज गुप्ता (40)

लक्ष्मी अवस्थी (42)

भर्ती रोगियों के आंकड़े

जिला अस्पताल में 1 जनवरी से लेकर 19 जनवरी के मध्य ठंड लगने से बीमार होकर आने वाले रोगियों में 107 रोगी कपकपी लगने के बाद बुखार और बेहोश होने तथा 66 रोगी कोल्ड डायरिया के अस्पताल में भर्ती किए गए। इनमें 32 को हैलट कानपुर रिफर किया गया है।

ठंड के रोगियों के लक्षण

डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि ठंड लगने के शिकार रोगियों में यह लक्षण प्रमुख रूप से पाए जाते हैं।

1- कपकपी लगना, बेहोशी आना।

2- जूड़ी लगने के साथ उल्टी-दस्त आना।

3- सीने में जकड़न और बच्चों को सांस लेने में तकलीफ होना।

4- रक्त का जमाव होने से सांस लेने में तकलीफ।

5- रक्त में जमाव होने से सीने में दर्द के साथ बेहोशी और हार्ट अटैक।

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