यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 12, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
'शांतिदूत' पर मौत का झपट्टा
सहारनपुर : शांति के दूत माने जाने वाले पक्षी कबूतर का जीवन संकट में है। इस पक्षी पर आरडी-1 वायरस और

सहारनपुर : शांति के दूत माने जाने वाले पक्षी कबूतर का जीवन संकट में है। इस पक्षी पर आरडी-1 वायरस और आइफ्लू ने कहर बरपा रखा है। एक माह में इन बीमारियों की चपेट में आने से हजारों कबूतर मारे जा चुके हैं। कबूतर पालने के शौकीन परेशान हैं और बीमारी का कोई सटीक इलाज न होने के चलते पशु चिकित्सक बेबस हैं। हालात यह हैं कि इलाज नहीं होने पर कबूतर पालने वाले उसे अस्तपाल में ही छोड़ देते हैं।
मुगलकालीन सहारनपुर कबूतरबाजी के लिए भी विख्यात है। मद्रास, हैदराबाद, कलकत्ता व दिल्ली आदि राज्यों में भी यहां से कबूतर जाते हैं। आज भी हजारों की संख्या में लोग कबूतर पालते हैं। इन दिनों ज्यादातर कबूतर पालक मई में होने वाले मुकाबले के लिए कबूतरों को तैयार कर रहे हैं। एक महीने में शहर में तीन हजार पालतू तथा जंगली कबूतर मारे जा चुके हैं। छोटा इमामबाड़ा निवासी उस्ताद अता व रसूलपुर के उस्ताद अफजाल के 100 कबूतरों ने दम तोड़ दिया। माहीपुरा निवासी वकार अहमद के 90 कबूतर, तो बेरी बाग निवासी अजय के 70 कबूतर मर चुके हैं। रमजान पुरा के मास्टर यूसुफ के सौ से अधिक पक्षियों की मौत हो चुकी है। मंडी स्थित जैन अस्तपाल में इस समय बीमारी से ग्रस्त कबूतरों का तांता लगा है। इलाज के बावजूद भी कबूतर मर रहे हैं। देवबंद, बेहट व गंगोह भी कई स्थानों पर सैकड़ों कबूतर इस बीमारी से मर चुके हैं।
क्या है बीमारी
इस (आरडी-1) वायरस को न्यू कैंसल डिजीज (रानीखेत) के नाम से भी जाना जाता है। करीब 70 वर्ष पहले यह बीमारी उत्तराखंड के रानीखेत स्थान पर पहली बार प्रकाश में आई थी।
बीमारी के लक्षण
आरडी-1 वायरस की चपेट में आया पंछी सुस्त हो जाता है। वह लकवाग्रस्त होकर दाना व पानी तक लेना छोड़ देता है। 15 से बीस दिन में उसकी मौत हो जाती है। आमतौर पर यह बीमारी मुर्गियों को होती थी। कबूतर आइफ्लू का भी शिकार हो रहे हैं।
क्या है स्थिति
न्यू कैंसल डिजीज व आइफ्लू बीमारी से ग्रस्त कबूतरों का इलाज जैन पशु अस्पताल में हो रहा है। यहा रोज सौ से अधिक कबूतर उपचार को लाए जा रहे हैं।
कैसे हो बचाव
डाक्टर एसके अरोरा के अनुसार बीमारी की रोकथाम को पहले पक्षी को आरडी वैक्सीन लगवाना चाहिए। पक्षियों में यदि वायरस का हमला हो गया है तो उसके बचाव के लिए बीमारी ग्रस्त पक्षियों को स्वस्थ पक्षियों से अलग रखें।
