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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 01, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

खाली हो गया लोई कैंप

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Published: Wed, 01 Jan 2014 03:10 AM (GMT+05:30)Updated: Wed, 01 Jan 2014 03:11 AM (GMT+05:30)

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बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर) : करीब साढ़े तीन माह तक चला लोई का शरणार्थी कैंप मंगलवार को पूरी तरह खाली हो गया। प्रशासन ने यहां रह रहे शेष लोगों को भी समझा-बुझाकर वाहनों से घर भेज दिया। इसी दौरान बैंक कर्मियों ने शिविर में पहुंचकर विस्थापितों के खाते खोलने के लिए फार्म भरे। खाली जगह पर पुलिस फोर्स तैनात कर दी गयी है, ताकि कोई बरगलाकर किसी को शरणार्थी के रूप में यहां न भेज सके। यहां से जाने के बाद विस्थापितों की दिक्कतों को हल करने के लिए 29 अधिकारियों की कमेटी गठित की गयी है।

ध्यान रहे कि दंगे के दौरान सैकड़ों परिवारों ने यहां शरण ली थी। जिला प्रशासन पिछले कई दिनों से लोगों को कैंप से वापस भेज रहा था। मंगलवार को भी लोगों को वापस भेजने का अभियान जारी रहा। सुबह बारिश के चलते झुग्गियां हटवाने का काम बंद रहा। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य प्रवीर कुमार ने शिविर का सुबह दौरा किया तो प्रशासनिक अमला शिविर में मौजूद रहा। सुबह इक्का-दुक्का परिवार ही शिविर से शिफ्ट किए गए।

दोपहर में बुढ़ाना तहसील प्रशासन ने इंतजामिया कमेटी के सदस्यों के साथ तंबू हटवाने शुरू किए। प्रशासनिक अधिकारियों ने सरकारी वाहनों से शरणार्थियों को गांव लोई, नीमखेड़ा, कैराना, लोनी आदि स्थानों पर भिजवाया। शाम चार बजे तक दर्जनभर झुग्गियां बची थीं जिसे देर शाम तक हटा दिया गया और पूरा कैंप खाली हो गया। खरड़ के लोगों ने डीएम से मुआवजे की मांग की थी। जिस पर डीएम ने सुरक्षित स्थान पर जाने के बाद मुआवजे का आश्वासन दिया था। खरड़ के विस्थापितों का सर्वे होने के बाद आज बैंक के खाते खोलने का काम भी शिविर में चला। लोगों के पास खाता खोलने के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं थे। प्रशासन की स्वीकृति पर बैंक कर्मी शिविर में पहुंचे और खाता खोलने के लिए फार्म भरवाए गए।

प्रशासन ने दस दिनों के लिए खाद्य सामग्री की किट प्रत्येक परिवार को दी है। एडीएम इंद्रमणि त्रिपाठी व एसडीएम मुनीश कुमार शर्मा ने कैंप पूरी तरह खाली होने की पुष्टि की है। एसडीएम ने बताया कि सभी परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। यहां से जाने के बाद लोगों को परेशानी न हो, इसके लिये 29 अधिकारियों की कमेटी बना दी गयी है। प्रशासन के अनुसार मंगलवार को लगभग 110 झुग्गियां हटाकर कैंप पूरी तरह खाली करा दिया गया। इंतजामिया कमेटी के अध्यक्ष राव अब्दुल जब्बार ने बताया कि लोई कैंप पूरी तरह खाली हो गया है और विस्थापितों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया है। खरड़ के के अधिकांश विस्थापित खामपुर चले गए हैं।

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संपर्क में रहेंगे अधिकारी

कुछ लोग आसपास तो कुछ दूसरे प्रांतों में भी गए हैं। वहां भी उन्हें कोई परेशानी न हो, इसके लिये बनायी गयी कमेटी नजर रखेगी। यदि पानीपत में रहने वाले किसी शरणार्थी को परेशानी होती है तो यहां गठित अधिकारियों की टीम वहां के प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क कर उनकी समस्या का निदान करायेगी।

साढ़े तीन माह से ज्यादा चला शिविर

दंगे के चार-पांच दिन बाद ही लोई शिविर शुरू हो गया था। सबसे पहले यहां फुगाना के लोग पहुंचने शुरू हुए थे। इसके बाद अन्य गांवों के लोग आ गये। पिछले काफी समय से प्रशासन यहां रह रहे लोगों को वापस भेजने की कवायद में जुटा था। आखिर, मंगलवार को कैंप पूरी तरह खाली हो गया।

नजर आ रहा मैदान

कैंप में रात दिन शरणार्थियों की गतिविधियां जारी रहती थीं। कभी खाना बंटता था तो कभी कपड़े। मंगलवार को लोगों के चले जाने के साथ ये गतिविधियां भी बंद हो गयीं।

दुकानें भी सिमटीं

शरणार्थियों के रहने के कारण कुछ लोगों ने यहां दुकानें आदि भी खोल रखी थीं। ये दुकानें भी कैंप के साथ बंद हो गयीं।

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