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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 16, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कर्म से निकली ज्ञान गंगा

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Published: Sun, 16 Nov 2014 01:49 AM (IST)

मुरादाबाद । कहते हैं कर्म ही पूजा है। इस पूजा में सभी अपने-अपने तरीके से लगते हैं। फल के रूप में कुछ

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मुरादाबाद । कहते हैं कर्म ही पूजा है। इस पूजा में सभी अपने-अपने तरीके से लगते हैं। फल के रूप में कुछ पदोन्नति पाते हैं। कुछ बेहतर वेतन बढ़ोतरी को ही फल मानते हैं। पर, यहां एक ऐसा भी शख्स है, जिसने कर्म की पूजा को ज्ञान गंगा का माध्यम बनाया। फिर अनुभव को कलम बना समस्या समाधान के सात महासूत्र लिख डाले, जो अब अपराध नियंत्रण और विवेचना के क्षेत्र में हर दिन नया अध्याय लिख रहे हैं।

हम बात कर रहे हैं सहारनपुर शहर के दिल्ली रोड के मूल निवासी हाकिम राय की। उन्होंने 1962 में पुलिस में अपनी सेवा शुरू की। वक्त के साथ पदोन्नति मिली तो पुलिस उपाधीक्षक बन गए। इस बीच उन्होंने शाहजहांपुर, लखनऊ, आगरा, वाराणसी, मुरादाबाद जिले में अपनी सेवाएं दीं। 1998 में जब वे रिटायर हुए तो मुरादाबाद की अवंतिका कालोनी में अपना आवास बना लिया।

सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका मन अपने कर्म से अलग नहीं हुआ। कर्म पालन के दौरान आईं समस्याएं उनको बार-बार टोकती रहीं। ऐसे में पढ़ने के शौकीन राय ने सेवाकाल के अनुभव को लिपिबद्ध करने की ठान ली। एक एक क्षेत्र की समस्या और उसके समाधान पर वह किताबें लिखने लगे। सोलह साल की इस लेखन यात्रा के दौरान राय ने अपराध नियंत्रण, विवेचना, थाना प्रबंध, विधि विज्ञान और विवेचना, साइबर क्राइम, जघन्य अपराधों की विवेचना, विवेचना व चिकित्सीय शास्त्र जैसी सात पुस्तकें लिखीं। इनमें से दो पुस्तकों अपराध नियंत्रण और विधि विज्ञान व विवेचना को केंद्रीय गृह मंत्रालय के ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च डेवलपमेंट विभाग द्वारा गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस सम्मान के बाद भी पुलिस सेवा की समस्याओं के समाधान से वह पीछे नहीं हटे। बीते वर्ष से उन्होंने पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों में अपना अनुभव बांटना शुरू कर दिया। इसके लिए वह पुलिस अकादमी व ट्रेनिंग कालेज मुरादाबाद, न्यायिक अकादमी लखनऊ एवं उत्तराखंड के भवाली स्थित न्यायिक अकादमी में अधिकारियों की कक्षाएं लेने पहुंचे। इतना ही नहीं वह विशेष निमंत्रण पर सीबीआइ अधिकारियों की कक्षाओं में भी पढ़ाते हैं। श्री राय कहते हैं कि इस उम्र में भी व्यस्त रहना बीमारियों से दूर रखता है।

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समाजसेवा में भी रहते हैं सक्रिय

रिटायर्ड पुलिस उपाधीक्षक हाकिम राय ने सेवानिवृत्ति के बाद खुद को समाजसेवा से भी जोड़ा। इस वक्त वह सीनियर सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन में उपाध्यक्ष हैं। साथ ही पुलिस पेंशन बोर्ड में भी सक्रिय हैं। पुलिस के द्वारा हर गुरुवार को होने वाली काउंसिलिंग कमेटी के भी श्री राय सदस्य हैं।

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