यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 13, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
नब्बे फीसद पुलिसकर्मी बीमार
मुरादाबाद : मामूली चोर से लेकर खूंखार अपराधियों पर नकेल कसने को मुस्तैद सूबे की पुलिस को इलाज की दरक

मुरादाबाद : मामूली चोर से लेकर खूंखार अपराधियों पर नकेल कसने को मुस्तैद सूबे की पुलिस को इलाज की दरकार है। प्रशिक्षण को पीटीसी पहुंचे नब्बे फीसद जवान बीमार हैं। उनकी हालत देखते हुए बेबस अफसरों ने उन्हें सुबह की दौड़ से मुक्त कर दिया है। अब उन्हें सुबह योग व व्यायाम के सहारे फिट रखने की जद्दोजहद की जाएगी।
पुलिस प्रशिक्षण स्कूल में 422 पुरुष व 22 महिला आरक्षियों को दो महीने के कोर्स के लिए भेजा गया है। ये आरक्षी हेड मोहर्रिर बनेंगे। इसलिए दो महीनों में इन्हें भारतीय संविधान व कानूनों से संबंधित पूरी बारीकियां सीखनी हैं। सोमवार को जब प्रशिक्षण के पहले दिन इनकी दौड़ हुई तो सौ से ज्यादा धूल चाट गए। इसके बाद परेशान अधिकारियों ने इस पर चिंतन शुरू किया। सोमवार को सभी प्रशिक्षुओं का ब्योरा तलब किया तो पता चला कि इनमें से साढे़ तीन सौ पुलिसकर्मियों को उच्च रक्तचाप, मधुमेह, सांस, पेट संबंधी बीमारियां हैं। इतना ही नहीं तकरीबन दस पुलिसवाले तो एक बार हृदयाघात झेल चुके हैं। इनकी दिनचर्या दवा से शुरू होकर दवा पर ही खत्म होती है।
पुलिसकर्मियों का ये रिपोर्ट कार्ड देखकर तो अधिकारियों के होश उड़ गए। आनन-फानन में प्रशिक्षण कोर्स व दिनचर्या में भी फेरबदल किया गया है। अब इन प्रशिक्षणार्थियों से दौड़ की बाध्यता खत्म कर दी गई है। अब नियमित योग व शारीरिक व्यायाम के सहारे ही इनकी फिटनेस पर ध्यान दे दिया गया है।
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उम्र के हिसाब से समूहों में बांटे गए आरक्षी
आरक्षियों को 45 से 57 वर्ष की उम्र के हिसाब से समूहों में बांट दिया गया। प्रशिक्षण के लिए ये आरक्षी चार समूहों में जाएंगे। उस समूह में उसी उम्र वर्ग के आरक्षी रखे गए हैं। जिससे कि सभी के हिसाब से नीति तय करने में आसानी रहे।
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'जिलों में अनियमित काम करने के कारण कई आरक्षियों को पेट, दमा, सांस, रक्तचाप और मधुमेह की बीमारियां हैं। इसी के चलते दौड़ को खत्म कर दिया गया है। दो माह के इनडोर और आउटडोर कोर्स के दौरान आरक्षियों को इन बीमारियों से निजात दिलाई जाएगी।
रघुवीर लाल, डीआइजी पीटीसी
