यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 19, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
धंधा काला, कमाई मोटी
मेरठ : बदनामी का जंजाल न जाने मेरठ का पिंड कब छोड़ेगा? कमेले की सड़ांध से हापुड़ रोड का पीछा छूटा, किंत

मेरठ : बदनामी का जंजाल न जाने मेरठ का पिंड कब छोड़ेगा? कमेले की सड़ांध से हापुड़ रोड का पीछा छूटा, किंतु सोतीगंज में गाड़ियों के कटान का असाध्य रोग फैलता जा रहा है। जीपीएस से लैस वाहन पलक झपकते गायब कर दिए जाते हैं। सदर पुलिस इस काले कारोबार पर घना पहरा देती है। आसपास के राज्यों की पुलिस सोतीगंज की अबूझ पहेली से परास्त होकर लौटती रही है। सोमवार को घेराबंदी की पूरी कसरत करने के बावजूद पुलिस को बैरंग लौटना पड़ा। दरअसल करोड़ों में खेलता यह कारोबार पुलिस की जुबान पर ताला लगाकर रखता है।
करोड़ों की मंडी
वाहनों का कमेला दिल्ली रोड पर संक्रमण की तरफ फैला है। पहले दर्जनभर दुकानों तक सिमटा कारोबार अब सदर की बड़ी कोठियों तक गोदाम के रूप में जगह बना चुका है। कंकरखेड़ा, मवाना, जली कोठी, लिसाड़ी गेट और रोहटा रोड पर भी चोरी के वाहनों का कटान कर दिया जाता है। माना जाता है कि वाहनों के कमेले में पौने दो सौ दुकानें और सौ से ज्यादा गोदाम हैं। सूत्रों की मानें तो इस पूरे बाजार पर पुलिस का वरदहस्त है। एएसपी अजय मिश्रा के कार्यकाल को छोड़ दें तो कभी भी इस साम्राज्य को छेड़ने की किसी ने कोशिश नहीं की। सोतीगंज पुलिस के लिए सोने का अंडा देने वाली मुर्गी है, जिसे मारने का साहस कोई नहीं उठा पा रहा।
12 मिनट में कटती है गाड़ी
जिन गाड़ियों को बनाने में इंजीनियर माहभर पसीना बहाते हैं, उसे सोतीगंज के कबाड़खाने में महज 12 मिनट में रफा-दफा कर दिया जाता है। कलपुर्जे अलग-अलग कर दिए जाते हैं, जिसे बाद में बरामद कर पाना तकरीबन नामुमकिन हो जाता है।
हर दिन पांच गाड़ियां चोरी
मेरठ शहर और देहात में रोजाना तीन से पांच गाड़ियां चोरी हो रही हैं। अकेले अक्टूबर में ही 77 गाड़ियां चोरी हुई। गत 17 दिनों में मेरठ में 231 मुकदमे दर्ज हुए, जिसमें 47 मामले गाड़ी चोरी के हैं। हालांकि कुछ वाहन चोरी की रिपोर्ट पुलिस ने दर्ज भी नहीं की है। इस तरह देखें तो यह आंकड़ा कुल अपराधों का करीब 20 फीसदी है। दूसरी तरफ इन 17 दिनों में चोरी की एक भी गाड़ी पुलिस बरामद नहीं कर सकी है।
पुलिस छोड़ती है ठेका?
पुलिस सूत्रों की मानें तो सदर पुलिस ही सोतीगंज कमेले का ठेका छोड़ती है और कबाड़ी ठेका लेते हैं। सदर बाजार थाना और उसकी सोतीगंज चौकी भी मलाई में हकदारी जताती है।
खुफियागीरी से चूक जाती है बाहरी पुलिस
दिल्ली, हरियाणा व उत्तराखंड समेत कई अन्य राज्यों की पुलिस खाली हाथ लौटती रही है। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, मेरठ एक ऐसा जिला है, जहां विभिन्न जनपदों व राज्यों से चोरी कर लाए गए वाहन काटकर उनके पुर्जे बेच दिए जाते हैं। दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी की मानें तो मेरठ में वाहन कटान का ठेका स्थानीय थाना पुलिस छोड़ती है, क्योंकि जब भी वाहन चोरी के मामले में दिल्ली पुलिस स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर छापा मारती है, तो सूचना पहले ही लीक हो जाती है और उनकी पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ता है।
