यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 05, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
हाईकोर्ट में होगी महिला उत्पीड़न समिति
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने हाई कोर्ट परिसर में महिला वकीलों व कर्मियों क

लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने हाई कोर्ट परिसर में महिला वकीलों व कर्मियों के साथ होने वाले कथित दुर्व्यवहार व उत्पीड़न के मद्देनजर समिति का गठन किया है। इस समिति में अवध बार के वरिष्ठ अधिवक्ताओं, अपर महाधिवक्ता बुलबुल गोदियाल सहित हाई कोर्ट के एक ओएसडी को रखा गया है। यह कमेटी सुप्रीम कोर्ट के विशाखा केस की नजीर पर काम करेगी। याचिका प्रस्तुत कर कहा गया है कि महिलाओं का उत्पीड़न रोकने के लिए समिति बनाई जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने 1997 में विशाखा के मामले में व्यापक दिशा निर्देश जारी करते हुए पूरे देश में सरकारी व गैर सरकारी कार्यालयों में महिलाओं के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न को रोकने के सख्त आदेश दिए थे। इस मामले के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने संस्थाओं व कार्यालयों के उच्च अधिकारियों को जिम्मेदारी दी थी कि किसी महिला का उत्पीड़न न हो। हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ में भी जब यह मुद्दा कुछ महिला वकीलों ने याचिका के माध्यम से उठाया तो अदालत ने समिति बनाए जाने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह व न्यायमूर्ति अशोक पाल सिंह की खंडपीठ ने एक महिला अधिवक्ता की ओर से दायर याचिका पर यह आदेश दिए हैं। अदालत के समक्ष याचिका प्रस्तुत कर कहा गया कि हाईकोर्ट में में भी विशाखा केस की नजीर के अनुसार एक कमेटी बनाई जाए जिसके समक्ष महिला अधिवक्ता व महिला कर्मी शिकायत कर सकें। अदालत ने अवध बार एसोसिएशन के वरिष्ठ अधिवक्ताओं, रजिस्ट्रार तथा एक ओएसडी की कमेटी बनाए जाने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 12 दिसंबर को नियत करते हुए पीठ ने कहा है कि अवध बार अपना पक्ष अगली सुनवाई पर रख सकती है।
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