यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 25, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल से स्वतंत्रदेव सिंह या मोहसिन रजा की होगी छुट्टी
या तो स्वतंत्र देव को भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है या फिर शिकायतों के चलते मोहसिन रजा की मंत्रिमंडल से छुट्टी की जा सकती है।

लखनऊ [आनन्द राय]। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित प्रदेश सरकार के पांच मंत्रियों को 19 सितंबर तक विधानमंडल के किसी सदन का सदस्य बनना अनिवार्य है। विधान परिषद के चुनाव में जीत के बाद सिर्फ चार ही सदस्य विधानमंडल में पहुंचेंगे। बड़ा सवाल यह है कि आखिर मंत्रिमंडल से किसकी छुट्टी होगी। चर्चा तेज है कि या तो स्वतंत्र देव को भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है या फिर शिकायतों के चलते मोहसिन रजा की मंत्रिमंडल से छुट्टी की जा सकती है।
मंत्रिमंडल के पांच लोगों को सरकार में बने रहने के लिए 19 सितंबर के पहले विधानमंडल के किसी सदन का सदस्य होना जरूरी है। भारत निर्वाचन आयोग ने विधान परिषद की चार रिक्त सीटों पर उपचुनाव के लिए जो अधिसूचना जारी की है उसकी आखिरी तारीख 18 सितंबर है। यह महज संयोग हो सकता है लेकिन, सरकार के लिए यह सबसे बड़ी जरूरत थी। चार रिक्त सीटों पर उपचुनाव होना है, जबकि दावेदार पांच हैं। ऐसे में किसी एक का किनारे होना तय है। बड़ा सवाल यह है कि आखिर मंत्रिमंडल से किसकी छुट्टी होगी।
325 विधायकों वाली प्रचंड बहुमत हासिल करने वाली भाजपा ने 19 मार्च को जब सरकार बनाई तो शपथ लेने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व डॉ. दिनेश शर्मा, परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) स्वतंत्र देव सिंह और राज्यमंत्री मोहसिन रजा विधानमंडल के किसी सदन के सदस्य नहीं थे। अब इन सबको सरकार में रहने के लिए सदन का सदस्य होना जरूरी है।

अधिसूचना जारी होने के बाद जानकारों का कहना है कि अब अगर विधान परिषद का कोई सदस्य इस्तीफा भी देगा तो निर्धारित अवधि से पहले उपचुनाव की अधिसूचना नहीं हो सकती है। अभी तो कानपुर देहात की सिकंदरा विधानसभा सीट विधायक मथुरा पाल के निधन से रिक्त है लेकिन उसके उपचुनाव की अधिसूचना के लिए भी समय नहीं बचा है। ऐसे में सवाल लाजिमी है कि आखिर विधान परिषद की रिक्त चार सीटों पर किसका समायोजन होगा।
भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने हमेशा चौंकाने वाले फैसले किए हैं। संभव है कि 29 अगस्त से पांच सितंबर तक नामांकन करने की अवधि में वह कोई चौंकाने वाला ही फैसला कर दे लेकिन, चार सीटों पर रिक्तियों के बाद कयासों का दौर शुरू हो गया है। चर्चा तेज है कि या तो स्वतंत्र देव को भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है या फिर शिकायतों के चलते मोहसिन रजा की मंत्रिमंडल से छुट्टी की जा सकती है।
फैसले से जुड़ी होगी 2019 के चुनाव की डोर
भाजपा अब जो भी फैसला करेगी उसकी डोर 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों से भी जुड़ी होगी। कई महत्वपूर्ण पदों पर दलितों को मौका देकर भाजपा ने समीकरण मजबूत किया है। जगजाहिर है कि 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव ने पिछड़ा कार्ड खेलने में भाजपा ने सर्वाधिक सक्रियता दिखाई। इसी निमित्त विधानसभा चुनाव के ठीक एक वर्ष पूर्व भाजपा के प्रदेश की कमान पिछड़े वर्ग के केशव प्रसाद मौर्य को सौंपी गई। केशव के नेतृत्व में प्रदेश में कामयाबी भी मिली।
सरकार बनने के कुछ दिन बाद यह भी चर्चा उठी कि उन्हें केंद्र में मंत्री बनाया जा सकता है लेकिन, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने पिछले दौरे में दो टूक कह दिया कि केशव उप्र की राजनीति करेंगे और जब तक नए अध्यक्ष का चयन नहीं हो जाता तब तक प्रदेश नेतृत्व भी संभालते रहेंगे। अब जबकि अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री रहते उन्हें पांच माह से अधिक हो गए तो नए अध्यक्ष की भी चर्चा चल पड़ी है। संभव है कि संगठन में विशेष पकड़ रखने वाले स्वतंत्र देव सिंह को भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया जाए। स्वतंत्र देव मौजूदा समय में प्रदेश महामंत्री भी हैं।
वह भाजयुमो का प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए पूरे प्रदेश की नब्ज जानते हैं। हाल के चुनावों में मोदी व शाह की रैलियों के प्रबंधन में भी उनकी भूमिका रही है। स्वतंत्र देव को भाजपा प्रदेश की कमान इसलिए भी सौंप सकती है कि एक तरफ बिहार में उन्हीं की कुर्मी बिरादरी के नीतीश कुमार का साथ मिल गया है और दूसरी तरफ सपा का प्रदेश नेतृत्व कुर्मी बिरादरी के नरेश उत्तम पटेल के हाथ में है। प्रदेश में पिछड़ों में यादवों के बाद कुर्मी बिरादरी सबसे प्रभावी है।
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कराने होंगे लोकसभा के दो उपचुनाव
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य फूलपुर के सांसद हैं। इन दोनों के इस्तीफे के बाद गोरखपुर और फूलपुर संसदीय क्षेत्र में भी उपचुनाव कराने होंगे। राजनीतिक गलियारों में चर्चा रही कि विपक्ष बसपा सुप्रीमो मायावती को फूलपुर से और किसी बड़े निषाद नेता को समाजवादी पार्टी के टिकट पर गोरखपुर से चुनाव लड़ाया जा सकता है।
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यह गठबंधन सत्ताधारी दल के लिए चुनौती बन सकता है लेकिन, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने पूरे भरोसे के साथ दावा किया है कि वह अपने किसी सामान्य कार्यकर्ता को भी चुनाव लड़ाकर इन सीटों को भारी बहुमत से जीत लेंगे।
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रणनीति तौर पर कहीं चूक तो नहीं
पिछले दिनों पखवारे भीतर विधान परिषद से सपा के यशवंत सिंह, बुक्कल नवाब, सरोजिनी अग्रवाल, अशोक वाजपेयी और बसपा के ठाकुर जयवीर सिंह व अंबिका चौधरी (सपा से जीते) ने इस्तीफा दिया तो माना गया कि जरूरत सिर्फ पांच सीटों की थी।
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भाजपा ने अपनी रणनीति से ज्यादा सीटों के इंतजाम कर लिए। उपचुनाव के लिए अधिसूचना जारी करने में चूक सामने आ गई। एक वर्ष से कम अवधि की वजह से अंबिका और जयवीर की सीट पर उप चुनाव नहीं हो सकते।
