यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 11, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सहारनपुर दंगा खुफिया तंत्र की नाकामी से
लखनऊ (राज्य ब्यूरो)। सहारनपुर दंगे की जांच में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने भी घटना के लिए खुफि

लखनऊ (राज्य ब्यूरो)। सहारनपुर दंगे की जांच में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने भी घटना के लिए खुफिया तंत्र की नाकामी को जिम्मेदार माना है। सोमवार को आयोग के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को जांच रिपोर्ट सौंपी। इसमें पुलिस पर निरंकुश होने का आरोप भी लगाया गया है। साथ ही सुझाव भी दिए हैं। इसके अलावा आयोग ने मुजफ्फरनगर में पीड़ितों को मिल रही धमकियों पर प्रभावी कार्रवाई की बात कही है।
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष नसीम अहमद, सदस्य प्रो. फरीदा अब्दुल्लाह खान और सचिव सुरजीत चौधरी ने पांच कालिदास मार्ग स्थित सरकारी आवास पर मुख्यमंत्री से मुलाकात की। 26 जुलाई को सहारनपुर दंगे के संबंध में उन्होंने बताया कि पुलिस ने कार्रवाई में विलंब न किया होता तो दंगा रोका जा सकता था। आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस ने कई निर्दोषों को जेल भेज दिया है। आयोग की प्रवक्ता प्रो.फरीदा के मुताबिक मुख्यमंत्री को बताया गया गया है किमुजफ्फरनगर के फुगाना गांव में जिन सात लड़कियों के साथ दुष्कर्म किया गया था, अब मुकदमा वापस लेने के लिए उन्हें धमकाया जा रहा है। पांच से 15 लाख तक रुपये का लालच भी दिया गया। कामयाबी नहीं मिलने पर उनके परिवार और पैरोकारों को धमकियां दी जा रही हैं और इसमें पुलिस कर्मियों की मिलीभगत है। मुख्यमंत्री से मुजफ्फरनगर के लापता युवकों को उत्तराखण्ड के नियमों की तरह मृत मानकर परिजनों को आर्थिक मदद मुहैया कराने की बात भी कही। प्रो. फरीदा ने कहा कि सहारनपुर और मुजफ्फरनगर दंगों में बाहरी लोगों के होने की बात सामने आयी थी लेकिन उन्हें चिह्नित नहीं किया जा सकता है। इस मुलाकात के समय प्रमुख सचिव (गृह) नीरज गुप्ता, डीजीपी एएल बनर्जी समेत कई अधिकारी मौजूद थे।
आयोग की संस्तुतियां
सहारनपुर
-सहारनपुर दंगे की जांच को आयोग गठित हो।
-बर्बाद संपत्ति का मुआवजा दिया जाए।
- निर्दोषों की रिहाई और दंगाइयों की गिरफ्तारी हो।
- उपचुनाव को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हों।
-शांति समितियां गठित कर सक्रिय की जाएं।
- डीएम की अध्यक्षता में सिख और मुस्लिम समुदाय की कमेटी गठित कर भूमि विवाद का सर्वमान्य हल निकाला जाए।
मुजफ्फरनगर
-दुष्कर्म पीड़ितों को सुरक्षा व धमकी देने वालों पर कार्रवाई।
-दंगों के तीन माह बाद तक नहीं लौटे लोगों के आश्रितों को मुआवजा।
-एक घर में रहकर तीन चूल्हों में भोजन तैयार करने वाले परिवारों को तीन परिवार मान मुआवजा।
-संदिग्ध भूमिका वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई।