यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 08, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
लखनऊ मेट्रो में लोड टेस्टिंग शुरू उसके बाद चलने की तैयारी
एलएमआरसी के प्रबंध निदेशक कुमार केशव ने बताया कि हजरतगंज में ब्रेक थ्रो करके गोमती टनल बोरिंग मशीन को निकाला गया।

लखनऊ (जेएनएन)। नॉर्थ-साउथ कॉरीडोर के सेकेंड फेस के काम की गति बताती है कि लखनऊ मेट्रो अपने टारगेट को इस बार भी समय से पूरा कर लेगी। जी हां, सचिवालय से हजरतगंज के बीच छह माह में जहां 812 मीटर लंबी सुरंग तैयार हो गई है वहीं डाउन लाइन की 782 मीटर लंबी सुरंग भी तैयार है। रविवार को एलएमआरसी के प्रबंध निदेशक कुमार केशव ने बताया कि हजरतगंज में ब्रेक थ्रो करके गोमती टनल बोरिंग मशीन को निकाला गया। उन्होंने कहा कि यूपी के लिए यह ऐतिहासिक क्षण है क्योंकि उप्र में लखनऊ ऐसा शहर है जहां मेट्रो सबसे पहले चलेगी।
उन्होंने बताया कि 75 मीटर लंबी टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) को निकालने का काम शुरू कर दिया गया है। अब छह सप्ताह के भीतर सचिवालय से हुसैनगंज के बीच सुरंग बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि तीनों स्टेशनों पर सुरंग बनाने का काम दिसंबर 2018 तक हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा। यही नहीं, फिनिशिंग का काम मार्च 2019 तक खत्म करके मेट्रो चला दी जाएगी। टाटा प्रोजेक्टस लिमिटेड के प्रबंध निदेशक विनायक देशपांडे ने बताया कि समय से पहले टारगेट को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
लखनऊ मेट्रो ने लोड टेस्टिंग के लिए मवैया स्टेशन स्पैन पर दो मेट्रो को लोड करके खड़ा कर दिया है। यह मेट्रो 72 घंटे के लिए स्पैन पर खड़ी रहेंगी। इनके हर मूवमेंट को लखनऊ मेट्रो के अभियंता मेजरमेंट करके मुख्य रेल मेट्रो संरक्षा आयुक्त को रिपोर्ट भेजेंगे। सूत्रों के मुताबिक मवैया के बाद अवध रोटरी और फिर किसी गर्डर पर लोड टेस्टिंग तीन-तीन दिन के लिए की जाएगी। इसके बाद आठों स्टेशनों के सिगनल को बाइपास करके मेट्रो को अस्सी किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाया जाएगा।
इस दौरान मुख्य रेल मेट्रो संरक्षा आयुक्त सतीश कुमार पांडे व उनकी टीम यह ट्रॉयल देखेगी। यही नहीं, लोड टेस्टिंग के दौरान भी टीम बीच-बीच में निरीक्षण करेगी। इस रिपोर्ट के आते ही लखनऊ मेट्रो को क्लीयरेंस मिल सकेगा। तब कहीं जाकर राजधानी में मेट्रो के चलने का रास्ता साफ होगा।
