यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 07, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र में शामिल होगा चित्रकूट
प्रभु श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट अब अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र में शामिल होगा। यह संकल्प राष्ट्रीय रामायण मेले के उद्घाटन अवसर ...और पढ़ें

लखनऊ। प्रभु श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट अब अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र में शामिल होगा। यह संकल्प राष्ट्रीय रामायण मेले के उद्घाटन अवसर पर केंद्रीय पर्यटन, संस्कृति एवं नागरिक उड्डयन मंत्री डा. महेश चंद्र शर्मा ने लिया। उन्होंने कहा कि जिस रामराज्य की स्थापना भगवान श्रीराम ने चित्रकूट में की थी उसको पूरे विश्व में पर्यटन के माध्यम से पहुंचाना है।
43वें राष्ट्रीय रामायण मेले का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि पर्यटन स्थल सिर्फ विदेशी मुद्रा अर्जन का केंद्र नहीं हैं अपितु धर्म और संस्कृति को जोडऩे का काम करते हैं। देश एक टुकड़ा मात्र नहीं, जीते जागते संस्कृति व संस्कारों की गंगा है जो चित्रकूट, अयोध्या व तिरुपति जैसे धार्मिक स्थलों से होकर बहती है। उन्होंने कहा कि पर्यटन में अब भी हम बहुत पीछे हैं। भारत में विश्व के सिर्फ एक फीसद पर्यटक आ पाते हैं। उसकी वजह पर्यटन स्थलों में मूलभूत सुविधाओं का न होना है। अब मोदी सरकार ने पर्यटन के लिए काम करना शुरू किया है। रामायण, कृष्ण व बुद्ध सर्किट बनाने का निर्णय लिया है। प्रत्येक सर्किट को पहली किस्त के रूप में 170 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। रामायण सर्किट में वैसे तो श्रीलंका से नेपाल तक काम होना है लेकिन पहले चरण में चित्रकूट व अयोध्या के बीच काम किया जाएगा। जल्द ही चित्रकूट को आदर्श पर्यटन केंद्र बनाएंगे, क्योंकि यहां पर भगवान राम से जुड़े स्थलों में मंदाकिनी, कामदगिरि सहित तमाम पर्यटक स्थल तो हैं ही नानाजी द्वारा स्थापित समाजसेवा की सबसे बड़ी संस्था भी है। यह सब कुछ चित्रकूट को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र बनाने के लिए काफी है। उन्होंने देवांगना हवाई पïट्टी को भी जल्द उपयोगी बनाने का वादा किया। इसके पहले केंद्रीय राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने चित्रकूट के महत्ता और अमावस्या मेले में प्रति माह आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की चर्चा करते हुए पर्यटन की अपार संभावनाएं गिनाईं।
