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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 26, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अलाव बुझा, बुझी जिंदगी

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Published: Thu, 26 Dec 2013 11:43 PM (GMT+05:30)

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अमरोहा। बढ़ती ठंड में गरीबों की उम्मीद मात्र अलाव है। अलाव जलता है तो जिंदगी चलती है। अलाव बुझता है तो जिंदगी ठहरती है। बतकही की यह लाइन गुरुवार को सतकही बन गई। विकलांग फकीरा ने जिस अलाव में जिंदगी की उम्मीद की झलक देखी वही अलाव उसकी मौत का कारण बन गया। न फकीरा ने कोई गलती कि और न ही अलाव से आग लगी। बस, अनुमान धोखा खाया और अलाव संग उसकी जिंदगी भी धोखा खा गई। ठंड से अलाव बुझा तो तुरंत कहीं जा पाने में असमर्थ फकीरा की जिंदगी भी बुझ गई।

नगर के मुहल्ला धुनपुरी निवासी धन सिंह का बेटा फकीरा दोनों पैरों से विकलांग था। मानसिक रूप से भी पूरी तरह स्वस्थ नहीं था। बैसाखी के सहारे चलता था। बुधवार को वह घर से निकल आया। इधर-उधर घूमता हुआ रात में सरकारी अस्पताल के सामने नगर पंचायत के वार्ड सदस्य संजय अग्रवाल की दुकान के समक्ष अलाव तापने लगा। संजय अग्रवाल ने उसे समोसे खिलवाए व चाय पिलवाई। इस दौरान विकलांग फकीरा अपना पता ठीक से बताने की स्थिति में नहीं था। लिहाजा संजय अग्रवाल उसे दुकान के सामने ही अलाव तापता हुआ छोड़ गए। इसके बाद वह वहीं इस उम्मीद में बैठा रहा कि अलाव के सहारे सारी रात कट जाएगी। इस बीच ठंड से अलाव ठंडा हो गया तो उसपर शीतलहर का प्रकोप बढ़ गया। पैर से विकलांग होने के कारण वह तत्काल कहीं जा भी नहीं पाया। थाना चौराहे से चौपला जाने वाले मार्ग के किनारे पड़ा वह रात में किसी को भी शायद दिखाई नहीं दिया। इसी कारण उस पर कोई तरस भी नहीं खा पाया। सुबह के आठ बजने पर जब चहल पहल शुरू हुई और आसपास के दुकानदारों की नजर उस पर पड़ी तबतक बहुत देर हो चुकी थी। बीस वर्षीय फकीरा ठंड से सिकुड़ चुका था। पहले उसे लोगों ने हिला कर होश में लाने की कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। हालांकि उसकी नब्ज चल रही थी। लिहाजा उसे सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां अधीक्षक डा. योगेंद्र सिंह व डा. श्योराज सिंह ने उसे इंजेक्शन दिया। नब्ज कमजोर पड़ती देख रेफर कर जिला मुख्यालय भिजवा दिया। जिला मुख्यालय से उसे मंडल मुख्यालय ले जाया जा रहा था कि रास्ते में ही उसकी सांस चली गई, छोड़ गई तो कुछ सवाल। मसलन इस ठंड में गरीबों की जिंदगी अलाव को लेकर प्रशासन कब सतर्क होगा। उस समय पुलिस कहां थी, उसकी गस्ती कहां थी, जिसकी नजर फकीरा पर नहीं पड़ी।

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हालत खराब होने पर किया रैफर

सीएचसी के अधीक्षक डा. योगेंद्र सिंह ने बताया कि ठंड के कारण ही उसकी हालत बिगड़ी हुई थी। इसलिए उसे रेफर किया गया था।

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बेटा मिला पर..

धुनपुरी की खजानो ने अपने विकलांग बेटे को ढूंढ तो लिया, लेकिन उससे बात नहीं कर सकी और बेटे ने दम तोड़ दिया। विकलांग बेटे को तलाशती हुई खजानो गुरुवार की सुबह करीब दस बजे सरकारी अस्पताल तक पहुंची, तब उसे पता लगा कि उसका बेटा अस्पताल में भर्ती है। खजानो ने बेटे से बात करनी चाही, लेकिन बेहोश होने के कारण कोई जवाब नहीं मिला। जिला मुख्यालय से मंडल मुख्यालय ले जाते समय उसकी मौत हो गई।

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पुलिस व्यवस्था पर भी उठा सवाल

रात भर सरकारी अस्पताल के कुछ फासले पर पडे़ रहे विकलांग ने पुलिस व्यवस्था पर भी सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। यदि पुलिस गश्त करती होती तो शायद उसे यह विकलांग सड़क किनारे पड़ा जरूर दिखाई दे जाता।

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