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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 13, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सीएम को करना होगा प्रायश्चित : रामभदनचार्य

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Published: Fri, 13 Sep 2013 05:44 PM (IST)Updated: Fri, 13 Sep 2013 07:09 PM (IST)

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चित्रकूट, जागरण संवाददाता : चौरासी कोसी परिक्रमा को लेकर विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल के साथ लखनऊ में गिरफ्तारी देने वाले जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य अपने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के न आने पर काफी खफा दिखे। इशारे-इशारे में सीएम के रद्द कार्यक्रम के लिए अंकल्स को दोषी ठहराया। कहा कि विकलांगों के बीच न आने का सीएम को भी प्रायश्चित करना पड़ेगा। उन्होंने खुद को सांप्रदायिक न होने की दुहाई देते हुए कहा कि देश की शिक्षा तुष्टीकरण की भेंट चढ़ गई है। जिससे उसकी गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ा है।

जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय के पंचम दीक्षांत समारोह में शिरकत करने शुक्रवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को आना था लेकिन ऐन वक्त पर गुरुवार की रात उनका धर्मनगरी आगमन कार्यक्रम रद्द हो गया। सीएम ने अपनी जगह पर अतिरिक्त उर्जा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विजय मिश्र और माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री विजय बहादुर पाल को भेजा। दोनों मंत्रियों ने कहा कि विषम परिस्थितियों में सीएम दीक्षांत समारोह में नहीं आ सके। उन्होंने अपने उद्बोधन में विवि के कुलाधिपति स्वामी रामभद्राचार्य की तारीफ के खूब कसीदे कसे पर इसके बाद भी स्वामी जी का क्षोभ कम नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि सीएम के न आने का उनको काफी दुख है। सीएम ने खुद आने का समय दिया था मैने नहीं मांगा था। पहले 12 सिंतबर और फिर एक दिन कार्यक्रम बढ़ा दिया। इसके बावजूद नहीं आए। विकलांग बच्चों के बीच वे 15 मिनट को आ सकते थे। जिसने भी अवरोध उत्पन्न किया है उसको विकलांगों की आह लगेगी। सीएम को भी प्रायश्चित करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विवि की बिजली व पानी को फ्री करें। साथ ही कहा कि अक्टूबर से विवि बिजली और पानी का बिल नहीं देगा।

तुष्टीकरण से शिक्षा चौपट

जगद्गुरु ने शिक्षा के गिर रहे स्तर के लिए तुष्टीकरण को जिम्मेदार माना। उन्होंने कहा कि जब तक तुष्टीकरण चलता रहेगा शिक्षा में गुणवत्ता आ नहीं सकती। विकलांग की कोई जाति नहीं होती। वेदों में जाति की चर्चा तो है पर जातिवाद की नहीं। प्रदेश में यदि जातिवाद न होता तो वह देश का मुकुट होता। विकलांग स्वयं अल्पसंख्यक हैं। विकलांग किसी भी जाति, धर्म का हो उनके लिए महेश्वर हैं। वोट बैंक के लिए तुष्टीकरण खतरनाक है।

अंकल्स से परेशान हैं सीएम

स्वामी रामभद्राचार्य यही नहीं रुके, बोले सीएम अखिलेश में प्रतिभा की कमी नहीं है लेकिन वे अंकल्स से परेशान हैं। वृद्ध को प्रेरणा देना चाहिए और युवा को काम करना चाहिए। अंकल्स को यदि अकल आ जाए तो अखिलेश राजनीति के क्षितिज में नक्षत्र बना सकते हैं।

संत की गढ़ी नई परिभाषा

स्वामी जी ने कहा कि संत उसे कहते हैं जो राष्ट्र की समस्याओं के समाधान का प्रयास करता है। संत उसे नहीं कहते जो हजारों चेला -चेली से घिरे रहते हैं। वे विकलांगता रूपी समस्या को कालघूंट के रुप में पी रहे हैं लेकिन विवि को आगे चलाने में थक गए हैं। अब इसको सरकार ले ले। केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने में सरकार का सहयोग मांगा।

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