यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 09, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सरेराह दंपती को गोली मारी

जागरण संवाददाता, बरेली : सरेराह बदमाशों ने कार सवार दंपती को गोली मार दी। इससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना में एक मासूम बाल-बाल बच गई। घटना की सूचना मिलते ही परिजन और पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और घायल दंपती को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया। जहां दोनों की हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस लूट और पुरानी रंजिश दोनों ही बिंदुओं पर एक साथ काम कर रही है।
चक महमूद बारादरी निवासी राजवीर सिंह (32) डेयरी संचालक हैं। रविवार को वह पत्नी मुनीषा व डेढ़ साल की मासूम के साथ फतेहगंज पूर्वी स्थित अपनी ससुराल गए थे। रात करीब साढ़े नौ बजे जब वे लोग लौट रहे थे, तभी नरियावल नहर के पास पहुंचते ही उनकी कार अचानक खराब हो गई। इसी बीच तीन चार अज्ञात बदमाश आए और मुनीषा पर फायर झोंक दिया, जिससे एक गोली मुनीषा के सिर के पिछले हिस्से में जा धंसी। इसके बाद बदमाशों ने कार की ड्राइविंग सीट पर बैठे राजवीर पर फायर झोंके। जिसमें दो गोली राजवीर के दायें हाथ को भेदते हुए निकल गईं। इसके बाद बदमाश भाग गए। किसी तरह राजवीर ने घटना की जानकारी अपने परिजनों को दी। सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंच गए। इसी बीच बिथरी पुलिस को भी घटना की जानकारी दी गई। मौके पर आई पुलिस घायल दंपती को उपचार के लिए एक निजी अस्पताल लेकर आई, जहां दोनों की हालत गंभीर है। उधर एसएसपी आकाश कुलहरि, सीओ चतुर्थ अखंड प्रताप सिंह अस्पताल पहुंचे और घायलों का हालचाल लिया।
बच गई मासूम
मुनीषा के पास ही उसकी डेढ़ साल की मासूम बेटी भी बैठी हुई थी। इसे संयोग ही कहेंगे कि बच्ची को खरोंच तक नहीं आई।
तो क्या मुनीषा थी मुख्य टारगेट
जिस तरह से बदमाशों ने पहले मुनीषा को गोली मारी, उससे साफ है कि कहीं न कहीं वह मुख्य टारगेट थी। इसके बाद उसके पति राजवीर को गोली मारी गई। पहले हुई घटनाओं पर नजर डाली जाए तो एक सच सामने आता है कि अमूमन बदमाश पहले पुरुष को गोली मारते हैं फिर महिला को टारगेट बनाते हैं।
शीशे पर चिपके मिले मांस के अंश
कार की ड्राइविंग सीट से लेकर फ्रंट ग्लास तक मांस के अंश चिपके हुए हैं, जो घटना की भयावहता को बयां कर रहे हैं।
पिछली सीट पर खून और टूटे हुए बाल
कार की पिछली सीट पर खून और टूटे हुए बाल मिले हैं, जो शायद मुनीषा के हैं। मौके पर पहुंची फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट ने कार के शीशे, दरवाजे के हैंडल, बैक सीट, ड्राइविंग सीट आदि से साक्ष्य जुटाए हैं।
पति के ठीक पीछे नहीं थी मुनीषा
राजवीर कार चला रहे थे, जबकि मुनीषा उनके ठीक पीछे वाली सीट पर न बैठकर उसके बगल में बैठी हुई थी। सीट के नीचे मिली मुनीषा की चप्पल इस सच को बयां कर रही हैं।
कार के हैंडल पर खून किसका
कार के दो हैंडल पर खून लगा हुआ है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर यह खून किसका है, दंपति का या हमलावरों का।
पुरानी रंजिश तो नहीं
परिजनों की माने तो राजवीर की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी, जबकि सूत्रों की माने तो कर्फ्यू के दौरान चारों भाइयों पर कार्रवाई हुई थी। ऐसे में सवाल उठता है कि कहीं न कहीं इस पूरे मामले के पीछे पुरानी रंजिश का खेल हो सकता है।
ये सवाल बाकी
-अगर लूट के इरादे से हुआ हमला तो मोबाइल व महिला के गहने क्यों नहीं गए?
-ड्राइविंग सीट को एक भी गोली भेदते हुए नहीं गई है?
-अगर कार खराब हुई थी तो फिर अस्पताल के बाहर लाकर कैसे खड़ी कर दी गई?
-महिला ने बताया कि उनके पास रुपये थे, हालांकि पुलिस में उसने इस बाबत बयान नहीं दिया। अगर रुपये थे तो कितने और कहां से ला रहे थे। फिलहाल परिजनों को इस बाबत जानकारी नहीं?
-कार के शीशे पर भी गोली का कोई निशान नहीं है, इससे साफ है कि दरवाजा खोलकर ही गोली मारी गई?
-हाइवे पर कार खराब थी, ऐसे में कोई दरवाजा खोलकर क्यों बैठेगा और अगर दरवाजा नहीं खुला था तो लॉक क्यों नहीं था?
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पुरानी रंजिश में ही दंपती पर हमला किया गया है। रंजिश के बाबत परिजनों से जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल लूट के इरादे से हमला नहीं हुआ है।
आकाश कुलहरि, एसएसपी
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