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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 26, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पर्यावरण की फिक्र के साथ मंजिल होगी आसान

By Abhishek Pratap SinghEdited By:
Published: Fri, 26 Feb 2016 09:28 AM (GMT+05:30)Updated: Fri, 26 Feb 2016 09:38 AM (GMT+05:30)

सफर को सुहाना बनाने के साथ ही रेल पर्यावरण की हिफाजत का माध्यम भी बनेगी। भारतीय रेल न सिर्फ सौर ...और पढ़ें

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नई दिल्ली : सफर को सुहाना बनाने के साथ ही रेल पर्यावरण की हिफाजत का माध्यम भी बनेगी। भारतीय रेल न सिर्फ सौर ऊर्जा से 1000 मेगावाट बिजली बनाएगी, बल्कि दूर-दराज के स्टेशनों के आस-पास स्थित गांवों को
रोशन करने के लिए माइक्रो सौर ग्रिड का इस्तेमाल भी करेगी।

इसके साथ ही पवन ऊर्जा, कचरे से बिजली बनाने और रेल में ऊर्जा की खपत कम करने पर भी जोर दिया जाएगा ताकि कार्बन फुटप्रिंट को कम किया जा सके। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने गुरुवार को लोकसभा में रेल बजट 2016-17 पेश करते हुए इसका ऐलान किया। प्रभु ने कहा कि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय रेल ने आगामी पांच वर्षों में 1000 मेगावाट की क्षमता वाले ऊर्जा संयंत्र लगाने का लक्ष्य रखा है।

छतों पर 50 मेगावाट ऊर्जा संयंत्रों को लगाने के निर्देश जारी किए जा चुके हैं, साथ ही 100 मेगावाट की क्षमता स्थापित की जा रही है। इसके अलावा भारतीय रेल ने जैसलमेर में 25 मेगावाट का पवन चक्की बिजली संयंत्र लगा दिया है। अगले वर्ष 132.5 मेगावाट संयंत्र चालू करने के लिए काम चल रहा है। रेल मंत्री ने कहा कि दूरदराज क्षेत्रों में स्थित रेलवे स्टेशनों, निकटवर्ती क्वार्टरों और गांवों को बिजली आपूर्ति करने के लिए माइक्रो सौर ग्रिड की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं।

रेलवे ट्रैक के किनारे खाली पड़ी जमीन का इस्तेमाल सौर ऊर्जा के लिए करने की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी। प्रभु ने कहा कि भारतीय रेल ने अपना कार्बन फुटप्रिंट कम करने के लिए 10 से 15 प्रतिशत ऊर्जा खपत कम करने की संभावनाओं का पता लगाया है। रेल मंत्री ने कहा कि 500 से अधिक सवारी डिब्बों को खड़ा करने के लिए प्रमुख कोचिंग डिपो में ऑटोमेटिक कोच वाशिंग प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि कम पानी के इस्तेमाल से धुलाई की जा सके। इसके अलावा औद्योगिक उत्पादन इकाइयों को पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा रहा है।


इसके लिए प्रत्येक क्षेत्रीय रेलवे में कम से कम एक कारखाने का चयन किया जाएगा। जो इस संबंध में अच्छा प्रदर्शन करेंगे उन्हें एक शील्ड भी दी जाएगी। प्रभु ने कहा कि 2000 से अधिक स्थानों पर वर्षा जल संग्रहण की सुविधा भी मुहैया कराई गई है। जल के पुन: उपयोग पर भी जोर दिया जाएगा।

रेल में प्रतिदिन 250 मिलियन लीटर पानी की री-साइक्लिंग की कुल क्षमता में से फिलहाल केवल 20 मिलियन लीटर पानी का ही पुन: इस्तेमाल हो पा रहा है। भारतीय रेल स्टील के पुलों पर स्टील के स्लीपरों की जगह री-साक्लिंग प्लास्टिक वेस्ट से तैयार पर्यावरण अनुकू स्लीपर का इस्तेमाल करेगी।