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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 22, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

नायडू ने दिए सफलता के मंत्र, कहा- जहां हम बेहतर नहीं, वहां अच्छा करने की जरूरत

By Kamlesh BhattEdited By:
Published: Fri, 22 Sep 2017 07:34 PM (IST)Updated: Sat, 23 Sep 2017 01:07 PM (IST)

आइएसबी मोहाली में उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू ने स्टूडेंट्स को फाइव पी का मंत्र दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को पीपल, प्लेनेट, प्रासपेरिटी, पीस और पार्टनरशिप पर गुर दिए।

नायडू ने दिए सफलता के मंत्र, कहा- जहां हम बेहतर नहीं, वहां अच्छा करने की जरूरत
नायडू ने दिए सफलता के मंत्र, कहा- जहां हम बेहतर नहीं, वहां अच्छा करने की जरूरत

जेएनएन, मोहाली। इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आइएसबी) में शुक्रवार को उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने दो दिवसीय लीडरशिप शिखर सम्मेलन (आइएलएस) के उद्घाटन अवसर पर फाइव पी का मंत्र दिया। उन्होंने लोगों (पीपल), गृह (प्लेनेट), समृद्धि (प्रासपेरिटी), शांति (पीस) और साझेदारी (पार्टनरशिप) के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि हमें वहां अच्छा करने की जरूरत है, जहां हम बेहतर नहीं हैं। सम्मेलन में राजनीति, व्यवसाय, प्रौद्योगिकी, खेल, शिक्षा और मनोरंजन के क्षेत्र से लगभग 40 प्रख्यात नेताओं ने शिरकत की।

नायडू ने हिंदी में अपना भाषण शुरू किया। उन्होंने कहा कि हमें एक-दूसरे की ताकत में टैप करना चाहिए और विकास की कहानियों को बनाने के लिए नया अध्याय जोडऩा चाहिए। कल को बदलने के लिए हमें आज कार्य करना चाहिए। इसके लिए हमें अपने अतीत और पूर्वजों से सीखना चाहिए, क्योंकि इतिहास हमारे आज के निर्णयों के लिए एक महान मार्गदर्शक है। भारत के रूप में एक देश ने बहुत कुछ हासिल किया है। इसकी अर्थव्यवस्था कई देशों से बेहतर काम कर रही है। हमें उन क्षेत्रों की तलाश करनी चाहिए जहां हमने अच्छा नहीं किया है।

उन्होंने कहा कि आइएसबी एक बहुत ही प्रतिष्ठित संस्थान है और मैं यहां आने व विद्यार्थियों के साथ बातचीत करने के लिए बहुत खुश हूं। शिखर सम्मेलन का विषय कल का रूपांतरण है जो आज की वर्तमान स्थिति के लिए बहुत उपयुक्त है। आज के ऐतिहासिक नेताओं, वेदों और स्वामी विवेकानंद जैसे दार्शनिकों के हवाले से कई उदाहरणों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि हमें अपनी विरासत, संस्कृति और परंपराओं पर गर्व महसूस करना चाहिए। हमें पश्चिमी प्रभावों के चेहरे पर इन्हें अलग नहीं करना चाहिए। भारत के भविष्य को सुलझाने के लिए हमें आदर्श लोगों के साथ एक आदर्श देश बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए।

युवाओं को दिया मंत्र

आइएसबी के विद्यार्थियों से नायडू ने कहा कि आपको नौकरी तलाशने वालों के बजाय नौकरी बनाने वाले बनना चाहिए और नई ऊंचाइयों को मापना चाहिए। नायडू ने कहा कि खड़े हो जाओ, जागते रहो और सीखते रहो। अपने सपने सच होने तक मत रोको।

कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित

कार्यक्रम में पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर, केंद्रीय नागरिक राज्य मंत्री जयंत सिन्हा, पंजाब के कैबिनेट मंत्री ब्रह्म मोहिंद्रा, राकेश भारती मित्तल, कार्यकारी बोर्ड आइएसबी और आइएसबी डीन राजेंद्र श्रीवास्तव मौजूद रहे।

खुद को करो तैयार : मित्तल

राकेश भारती मित्तल ने विद्यार्थियों को अनिश्चितताओं का सामना करने के लिए तैयार रहने के लिए कहा, क्योंकि वे अपने भविष्य की योजना बनाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे इस तरह के शिखर सम्मेलन में अपने समय का उपयोग करें और कक्षाओं में भी अनिश्चित वातावरण में खुद को तैयार करने के लिए तैयार करें।

चुनौतियों के लिए रहो तैयार : सिन्हा

केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने कहा कि आजादी के बाद से हमारे पास देश की अगुआई करने के लिए तीन पीढिय़ों की कोशिश की गई है। लेकिन अब पिछला बीत चुका है, बैटन आपके हाथों में है। आपकी पीढ़ी अलग है। हमें उद्यमशीलता और दुनिया के नवाचार इंजन बनने की जरूरत है।

भारत की जीडीपी संरचना का उदाहरण लेते हुए उन्होंने बताया कि दूरसंचार क्षेत्र पहले कितना महंगा था, लेकिन अब हर किसी की पहुंच में है। उन्होंने भविष्य की प्रौद्योगिकियों जैसे ड्रॉन्स और यहां तक कि एयर रिक्शा की बात की। ऐसी समस्याओं पर जोर देते हुए कि भारत की असुविधा सूचकांक जैसे जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों की कमी, बढ़ा सकते हैं। इसलिए हमें चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने और कार्रवाई योजनाओं पर आने के लिए आइएसबी नेतृत्व शिखर सम्मेलन की तरह मंचों की आवश्यकता है।

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