यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 07, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मंगल पर मिला कुछ ऐसा, वैज्ञानिकों ने किया दावा- रहने लायक था यह ग्रह
यह मंगल ग्रह पर जीवन की संभावना के अनुमान को पुख्ता करता है, लेकिन इसकी पूरी तरह पुष्टि के लिए वैज्ञानिकों को और साक्ष्य जुटाने हैं।

वाशिंगटन, पीटीआई। वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह पर बोरॉन की खोज की है। इस आधार पर वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि मंगल ग्रह कभी रहने योग्य था। इस शोध में शामिल लॉस एलामॉस नेशनल लैब, अमेरिका के पैटिक गैसडा ने बताया, ‘पृथ्वी पर मौजूद सभी जीवों में रिबोन्यूक्लिक एसिड (आरएनए) पाया जाता है, जिसमें सभी जीवों के जीन से जुड़ी जानकारियां होती हैं। इन आरएनए को बनाने में बोरॉन की मुख्य भूमिका होती है।’
आरएनए का प्रमुख तत्व रीबोज (एक प्रकार की चीनी) होता है, लेकिन ये पानी में घुलकर तुरंत नष्ट हो जाते हैं। आरएनए नष्ट ना हो, इसके लिए बोरॉन की जरूरत पड़ती है। बोरॉन पानी में घुलकर बोरेट बनाता है जो रिबोज से प्रतिक्रिया कर आरएनए को लंबे समय तक स्थिर रखता है। गैसडा के अनुसार शोध में मंगल अर्थात लाल ग्रह पर 3.8 अरब वर्ष पुराने बोरेट्स मिले हैं, जो पृथ्वी पर जीवन के प्रारंभ होने से कुछ वर्ष बाद के हैं। मंगल पर कैल्सियम सल्फेट में बोरॉन पाया गया। इसका मतलब है कि बोरॉन उस ग्रह के भूजल में पाया जाता था।
बोरॉन की खोज केमकाम (केमिस्ट्री एंड कैमरा) नामक यंत्र से संभव हुई, जिसे लॉस एलामॉस नेशनल लैबोरेटरी और फ्रेंच स्पेस एजेंसी ने साथ मिलकर बनाया था। बोरॉन का पाया जाना मंगल ग्रह पर जीवन की संभावना के अनुमान को पुख्ता तो करता है, लेकिन इसकी पूरी तरह पुष्टि के लिए वैज्ञानिकों को और साक्ष्य जुटाने हैं।
क्या है बोरॉन: बोरॉन एक प्रकार का तत्व है, जो पृथ्वी के सतह और सौर मंडल में प्रचुर मात्र में पाया जाता है। यह कार्बन की तरह ही किसी भी जीव के विकास के लिए मूल तत्व है।
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