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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 15, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पति-पत्नी ने दस साल तक खुद को अंधेरे घर में रखा बंद

By Gunateet OjhaEdited By:
Published: Sat, 15 Oct 2016 01:02 PM (IST)Updated: Sat, 15 Oct 2016 01:07 PM (IST)

समय रहते ध्यान न देने से पति-पत्नी के साथ पूरा परिवार इस बीमारी की चपेट में आ गया।

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इंदौर, जेएनएन। करोड़ों रुपए का कारोबार, आलीशान फ्लैट और पति-पत्नी को डेली कॉलेज की डिग्रियां, लेकिन हालत मजदूरों से भी गई गुजरी। न घर में लाइट, न टीवी, न फ्रिज और न ही इनके बच्चे कभी स्कूल की चौखट चढ़े। चारों तरफ सन्नाटा, शक और डर का माहौल। यह किसी हॉरर फिल्म की स्टोरी नहीं, बल्कि स्नेहलतागंज में रहने वाले बड़जात्या परिवार के घर के हालात थे।

फॉली ए फैमिली और शेयर्ड सायकोसिस नाम की मनोवैज्ञानिक बीमारी से पीड़ित अंकुर बड़जात्या (बदला हुआ नाम) का परिवार 10 साल बाद अब घर से बाहर निकला और एक बार फिर सामान्य जिंदगी जीने की कोशिश कर रहा है। यह सब उसकी मां के कारण संभव होने जा रहा है।

समय रहते ध्यान देते तो नहीं होती ऐसी स्थिति

समय रहते ध्यान नहीं देने से पति-पत्नी के साथ पूरा परिवार इस बीमारी की चपेट में आ गया। अंकुर के तीन बच्चे हैं। बड़ी बेटी 9 साल की है। 7 और एक साल के बेटे हैं। दस साल से बेटे, बहू व पोते-पोतियों की इस बीमारी की पीड़ा झेल रही अंकुर की मां वीणा बड़जात्या एक मनोचिकित्सक की मदद से सभी को ठीक करने की कोशिश में जुटी हैं।

वीणा के मुताबिक- हमारा मार्बल्स का काफी बड़ा कारोबार है। बेटे की शादी के बाद सबकुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन दस साल पहले उसके स्वभाव में बदलाव दिखने लगा। गुस्सा, शक, चिड़चिड़ापन और कामकाज पर ध्यान नहीं देना सहनशक्ति के बाहर हो गया तो मैं भी पास में अलग रहने लगी। धीरे-धीरे उससे संपर्क खत्म होने लगा।

लाइट, वायरिंग तोड़ी, ताकि घर में रोशनी न रहे

वीणा के मुताबिक, वह हर चीज से डरने लगा था। बार-बार कहता था कि वो मुझे मार देंगे। टीवी, फ्रिज, मशीनें, ट्यूबलाइट सभी तोड़-फोड़ दिए। घर की सारी वायरिंग तोड़ दी। इस बीच तीन बच्चे हुए, लेकिन वह पत्नी को लेकर कब अस्पताल गया और आया, इसकी भनक किसी को नहीं थी। बच्चे भी बंद घर में अंदर ही रहते थे। मां खाना भेजती थी तो दरवाजा खोलकर खाना अंदर लेते और फिर बंद करके रहने लगते। तीन साल से अंकुर नहाया भी नहीं था। वीणा के अनुसार- वह परिवार पर भूत-प्रेत का साया समझकर तंत्र-मंत्र पूजा-पाठ पर लाखों रुपए खर्च कर चुकी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

बीमारी के लक्षण

- अचानक स्वभाव में बदलाव।

- लोगों से मिलने-जुलने से कतराना।

- कामधंधा छोड़कर घर बैठना।

- बार-बार एक ही बात दोहराना।

- अपना डर अपने सबसे करीबी (पति या पत्नी या बच्चों) पर भी हावी कर देना।

समय पर ट्रीटमेंट नहीं मिलने से बर्बाद हो जाते हैं लोग

मनोचिकित्सक डॉ. पवन राठी ने बताया कि जब मरीज से बीमारी दूसरे में चली जाती है तो उसे शेयर्ड सायकोसिस कहते हैं। यह रेयरेस्ट बीमारी है। पति के साथ-साथ पत्नी और बच्चे भी इसके शिकार हो गए। सही समय पर ट्रीटमेंट जरूरी है, वरना समय पर ट्रीटमेंट नहीं मिलने से बर्बाद हो जाते हैं लोग परिवार बर्बाद हो जाता। पति पर ट्रीटमेंट शुरू किया गया है। उसमें काफी परिवर्तन नजर आ रहा। वह परिवार के साथ धीरे-धीरे बाहर निकलने लगा है। दादी ने 9 और 7 साल के बच्चों का क्षेत्र के ही स्कूल में पहली बार एडमिशन कराया है।

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