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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 25, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मुंबई में अंबेडकर स्मारक बनने का रास्ता साफ

By Mohit TanwarEdited By:
Published: Sat, 25 Mar 2017 09:29 PM (GMT+05:30)Updated: Sat, 25 Mar 2017 09:42 PM (GMT+05:30)

करीब पांच साल पहले राज्य की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इंदू मिल की जमीन पर अंबेडकर स्मारक बनाने की घोषणा की थी।

मुंबई में अंबेडकर स्मारक बनने का रास्ता साफ
मुंबई में अंबेडकर स्मारक बनने का रास्ता साफ

राज्य ब्यूरो, मुंबई। मध्य मुंबई के दादर में स्थित इंदू मिल की 12 एकड़ जमीन राष्ट्रीय वस्त्र निगम (एनटीसी) ने महाराष्ट्र सरकार को सौंप दी है। समुद्र से सटे इसी भूखंड पर डॉ. भीमराव अंबेडकर का भव्य स्मारक बनाए जाने की योजना है।

करीब पांच साल पहले राज्य की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इंदू मिल की जमीन पर अंबेडकर स्मारक बनाने की घोषणा की थी। लेकिन केंद्र और राज्य दोनों जगह कांग्रेसनीत सरकारें होते हुए भी वह मिल की जमीन स्मारक के लिए नहीं दे सकी। राज्य में भाजपा के सत्ता में आने के बाद फड़नवीस सरकार एनटीसी को स्मारक के लिए जमीन देने के लिए राजी करने में सफल रही।

शनिवार को मुंबई स्थित विधानभवन में केंद्रीय वस्त्र उद्योग मंत्री स्मृति ईरानी एवं केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने वह 12 एकड़ भूखंड महाराष्ट्र सरकार को सौंप दिया। बाद में इसकी घोषणा विधानसभा में करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि अब राज्य सरकार इस भूखंड पर अंबेडकर के भव्य स्मारक के निर्माण का काम शीघ्र शुरू करेगी। भूखंड समुद्र के किनारे होने के कारण सरकार स्मारक निर्माण के लिए सीआरजेड (कोस्टल रेगुलेशन जोन) की अनुमति भी पहले ही हासिल कर चुकी है। मुख्यमंत्री ने जमीन हस्तांतरित करने के लिए प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय वस्त्र उद्योग मंत्री को धन्यवाद भी दिया।

बता दें कि राज्य में अंबेडकर स्मारक महाराष्ट्र में बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी रहा है। अक्टूबर 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों स्मारक का शिलान्यास करवाकर फड़नवीस सरकार ने इस दिशा में बड़ी सफलता हासिल की थी। उस समय समारोह का आयोजन स्मारक का निर्माण करनेवाली सरकारी संस्था एमएमआरडीए ने किया था।

अब यदि राज्य सरकार की योजनानुसार लगभग 425 करोड़ की लागत से बननेवाले अंबेडकर स्मारक का काम तेजी से आगे बढ़ा पाई तो यह महाराष्ट्र में दलितों के बीच भाजपा की जड़ें मजबूत करने में भी सहायक होगा।

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