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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 17, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

प्रशासनिक चूक से हुआ सहारनपुर दंगा: शिवपाल कमेटी

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Published: Sun, 17 Aug 2014 01:06 PM (IST)Updated: Sun, 17 Aug 2014 01:43 PM (IST)

सूबे के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव की जांच रिपोर्ट में सहारनपुर का दंगा प्रशासनिक चूक से हुआ। लोकनिर्माण ...और पढ़ें

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लखनऊ। सूबे के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव की जांच रिपोर्ट में सहारनपुर का दंगा प्रशासनिक चूक से हुआ। लोकनिर्माण एवं सिंचाई मंत्री की अध्यक्षता में गठित जांच दल ने शनिवार मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को अपनी रिपोर्ट सौंपी है। जांच दल ने दंगा भड़कने के पीछे प्रशासनिक चूक को मुख्य वजह माना है।

सहारनपुर में 26 जुलाई को सुबह एक गुरुद्वारा तथा कब्रिस्तान की जमीन को लेकर सांप्रदायिक संघर्ष हो गया था। समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दंगे की जांच करने को शिवपाल सिंह यादव के नेतृत्व में पांच सदस्यीय जांच दल का गठन किया था। इसमें प्राविधिक शिक्षा मंत्री शिवाकांत ओझा, ग्राम्य विकास राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार अरविन्द सिंह गोप, युवा कल्याण परिषद के उपाध्यक्ष आशू मलिक और मुरादाबाद के जिला अध्यक्ष हाजी इकराम कुरैशी शामिल थे।

इस जांच दल ने जो रिपोर्ट सीएम अखिलेश यादव को सौंपी है, उसमें कहा गया है कि अगर सहारनपुर में प्रशासनिक अधिकारी सूझबूझ से काम लेते तो सांप्रदायिक हिंसा को टाला जा सकता था। जांच दल ने दंगा भड़कने के पीछे प्रशासनिक चूक को मुख्य वजह माना है। दल ने कहा है कि हिंसा से पहली रात न तो भीड़ को एकत्र होने देना चाहिए था और न ही विवादित स्थल पर रात में लिंटर डालने की अनुमति दी जानी चाहिए थी।

जांच दल ने तीन अगस्त को सहारनपुर में श्री गुरु सिंह सभा में सिख समाज के लोगों से तथा शहर काजी के घर पर मुस्लिम समाज के नुमाइंदों से इस दंगे के बारे में विस्तार से बातचीत की थी। इसके अलावा शहर के अन्य लोग तथा सहारनपुर के अधिकारी सर्किट हाउस में इस दल से मिले थे। जांच दल ने माना है कि यदि अधिकारी सजग होते तो हिंसा न भड़कती। जब दंगा हुआ, तब रमजान चल रहे थे। ईद से पहले का माहौल था। प्रशासन को रात में विवादित स्थल पर लिंटर नहीं डालने देना चाहिए था। दूसरे पक्ष के लोगों को भी रात में एकत्र होने से रोका जाना चाहिए था। जो भी काम होना था, उसे दिन में कराना चाहिए था। इन दोनों घटनाओं ने तनाव का माहौल बनाया और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए।

इसके विपरीत प्रशासन ने कहा है कि दंगे के बाद प्रशासनिक स्तर पर सक्रियता दिखाई गई। इसी कारण दोपहर बाद हिंसा थम गई थी। 26 जुलाई को दोपहर में ही हिंसा को नियंत्रित कर लिया गया।

जांच टीम ने आपसी सहमति और अदालत के निर्देशों के मुताबिक विवादित जमीन के झगड़े का हल निकालने और दोनों ही पक्षों के जख्मों पर मरहम लगाकर सांप्रदायिक सौहार्द बहाली पर जोर दिया है। टीम ने माना है कि अगर सहारनपुर में यदि भीड़ जमा होने और लेंटर डालने के घटनाक्रम को रोक लिया जाता तो शहर को हिंसक घटना, तोड़फोड़ व आगजनी से बचाया जा सकता था। रात में भी स्थिति की नाजुकता को उतनी गंभीरता से नहीं लिया गया। इसमें शुरू में प्रशासनिक चूक रही लेकिन बाद में अधिकारियों ने स्थिति को संभाल लिया। जांच दल ने दंगे में हुए नुकसान का आकलन कर प्रभावितों को उचित मुआवजा देने समेत कई सिफारिशें की हैं।

सांसद की भूमिका पर सवाल

जांच दल ने सहारनपुर कुछ नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। इनमें भाजपा सांसद राघव लखनपाल भी शामिल हैं। शिवपाल सिंह यादव का कहना है सांसद ने शहर में निकलकर दंगाइयों को उकसाया। उनके उकसावे पर दुकाने जलाने की कोशिशें हुईं। जबकि अन्य नेताओं की भूमिका भी अच्छी नहीं रही।

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