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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 11, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

हिंदुकुश पर्वत श्रृंखला का पारा चढ़ने से बाढ़ सूखे का खतरा

By Gunateet OjhaEdited By:
Published: Fri, 11 Dec 2015 08:17 PM (IST)Updated: Fri, 11 Dec 2015 08:35 PM (IST)

हिमालय के पश्चिम में फैली हिंदुकुश पर्वत श्रृंखला का तापमान वर्ष 2050 तक पांच डिग्री तक बढ़ जाएगा। कुछ स्थानों ...और पढ़ें

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नई दिल्ली। हिमालय के पश्चिम में फैली हिंदुकुश पर्वत श्रृंखला का तापमान वर्ष 2050 तक पांच डिग्री तक बढ़ जाएगा। कुछ स्थानों पर यह वृद्धि एक-दो डिग्री तो कुछ पर चार से पांच डिग्री होगी। इसके कारण अफगानिस्तान, पाकिस्तान से लेकर भारत तक कभी भारी वर्षा तो कभी सूखे की घटनाएं बढ़ सकती हैं।

व‌र्ल्ड माउंटेन डे (12 दिसंबर) के मौके पर जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं का कहना है कि हालांकि अत्यधिक वर्षा का सिलसिला कम होता जा रहा है, लेकिन यह ज्यादा आक्रामक होगा और इसकी तीव्रता बढ़ जाएगी। तीन अंतरराष्ट्रीय संस्थानों इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट, नार्वे के ग्रिड एरेनडेल और सेंटर फॉर इंटरनेशनल क्लाइमेट एंड एन्वायरमेंट रिसर्च-ओस्लो (सिसेरो) द्वारा तैयार एटलस में यह चौंकाने वाली हकीकत बताई गई है। इसे 'मैपिंग एन अनसर्टेन फ्यूचर : एटलस ऑफ क्लाइमेट चेंज एंड वाटर इन फाइव क्रूसियल वाटर बेसिन्स इन द हिंदकुश' नाम दिया गया है।

यह पहला ऐसा एटलस है, जिसमें बदलती जलवायु और उसकी पांच नदी घाटियों-सिंधु, ब्रह्मपुत्र, गंगा, सालवीन और मेकांग के पानी के तापमान में वृद्धि के असर का व्यापक अध्ययन किया गया है। इसमें नक्शे और इंफोग्राफिक्स के माध्यम से बताया गया है कि कैसे क्षेत्र की जलवायु बदल रही है और उसे बचाने के क्या उपाय हो सकते हैं।

क्या-क्या खतरा

- तापमान बढ़ने से न केवल बर्फ पिघलेगी बल्कि अवक्षेपण (पानी सोखने) क्षमता भी प्रभावित होगी। सिंधु नदी क्षेत्र में ज्यादा असर होगा।

- हिमनदों के आसपास और निचले इलाकों में रहने वालों लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।

- हिंदुकुश पर्वत की अवक्षेपण क्षमता घटने से मानसून की अवधि बढ़ेगी और यह अधिक उग्र हो सकता है।

- नदियों के जलप्रवाह में अस्थिरता आएगी और मानसून पूर्व के महीनों में ज्यादा पानी की आशंका रहेगी।

- इससे अप्रत्याशित बाढ़ और सूखे का खतरा बढ़ेगा।

- नदियों से जीवन यापन करने वालों और खेती-बाड़ी करने वालों की सुरक्षा का संकट पैदा हो जाएगा।

- कृषि, जल संसाधन और स्वास्थ्य पर दूरगामी असर पड़ेगा।

कैसे करें बचाव

हिंदुकुश पर्वत क्षेत्र से जुड़े देश सहयोगात्मक रणनीति बनाएं और विकास के प्रति नरम रख अपनाएं। ताकि बहुत अधिक और बहुत कम वर्षा के खतरे से निपटा जा सके।

हिंदुकुश- एक नजर

- 3500 किमी क्षेत्र में फैली है हिंदुकुश पर्वत श्रृंखला

- अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, चीन, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल इससे जुड़े हैं।

- उक्त आठ देशों के 21 करोड़ लोग इस क्षेत्र में रहते हैं।

- इस क्षेत्र की नदियां 1.3 अरब लोगों को पानी उपलब्ध कराती हैं, जो पूरे यूरोप की आबादी के बराबर है।