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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 30, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

दिल्ली में रैलियों का रेला, जुटे दिग्गज

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Published: Sat, 30 Nov 2013 09:46 PM (IST)Updated: Sun, 01 Dec 2013 05:35 AM (IST)

दिल्ली में विधानसभा चुनाव के सिलसिले में शनिवार रैलियों का दिन रहा। अपनी पार्टी के प्रचार के लिए नरेंद्र मोदी, ...और पढ़ें

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जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। दिल्ली में विधानसभा चुनाव के सिलसिले में शनिवार रैलियों का दिन रहा। अपनी पार्टी के प्रचार के लिए नरेंद्र मोदी, नीतीश कुमार, मायावती, भूपेंद्र सिंह हुड्डा और लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान राजधानी में आए, तो आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल भी सड़क पर निकलकर प्रचार करते दिखे। जाहिर है कि विपक्षियों के निशाने पर मुख्यमंत्री शीला दीक्षित थीं, जो अपनी सत्ता को बनाए रखने के लिए देर शाम तक जूझती दिखीं। प्रचार अभियान का गौरतलब पहलू यह रहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तिलक नगर में होने वाली सभा को जापानी सम्राट अकिहीतो के आगमन के मद्देनजर रद कर दिया गया। राजनीतिक विश्लेषक इसके पीछे दिल्ली में मोदी की मौजूदगी को मान रहे हैं जिनकी जनसभाओं की तुलना में मनमोहन की रैली में कम भीड़ जुटने का खतरा था और इसका विपरीत असर कांग्रेस के चुनाव अभियान पर पड़ता।

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भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्तमंत्री पी चिदंबरम पर सीधा हमला किया। उन्होंने कहा कि इन दोनों के किताबी ज्ञान ने देश को बर्बाद कर दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री को अर्थशास्त्र के बारे में पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंह राव और अटल बिहारी वाजपेयी से नसीहत लेने की सलाह दी, जिन्होंने देश की जरूरत को समझकर उसे चलाया। मोदी ने दिल्ली में चार स्थानों पर सभा करके कांग्रेस सरकार के कार्यो की बखिया उधेड़ी। कहा, देश में व्याप्त महंगाई की कांग्रेस को चिंता नहीं है। इसीलिए उसके नेता महंगाई पर कुछ नहीं बोलते। वह हर तरह की जिम्मेदारी से बचना चाहते हैं। विकास को लेकर कांग्रेस और परोक्ष रूप में बिहार की नीतीश सरकार पर प्रहार करते हुए मोदी ने कहा, अगर बिहार में विकास हुआ होता तो वहां के लोग दिल्ली में क्यों आते और यहां की कठिनाइयों को क्यों झेलते। उन्होंने बदलाव के लिए भाजपा को जिताने की अपील की।

बसपा प्रमुख मायावती ने भी अन्य प्रदेशों से दिल्ली में आकर बसे लोगों की समस्याओं पर फोकस किया। उन्होंने कहा कि गरीबी और बेरोजगारी के चलते लोग रोजगार के लिए दिल्ली में आए लेकिन उन पर कांग्रेस व भाजपा की सरकारों ने कोई ध्यान नहीं दिया। दोनों ही दलों की सरकारों ने गरीबों की भलाई के लिए कुछ नहीं किया। अल्पसंख्यकों के कल्याण से दोनों ही दल मुंह मोड़ रहे। आसमान छूती कीमतों और भ्रष्टाचार से गरीबों का जीवन और मुश्किल हो गया है। दिल्ली की मौजूदा सरकार महिलाओं की सुरक्षा भी नहीं कर पाई। जिसके चलते आए दिन महिलाओं से बलात्कार की घटनाएं हो रही हैं।

थका देने वाले प्रचार अभियान की कमान संभाले मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने दिल्ली में नरेंद्र मोदी का कोई प्रभाव पड़ने से इन्कार किया। उन्होंने कहा, दिल्ली देश की राजधानी है यहां बहुत से नेता आते हैं-वैसे ही मोदी भी आए हुए हैं। इससे ज्यादा कुछ नहीं। अगर उनका प्रभाव होता तो कर्नाटक में भाजपा नहीं हारती। मोदी ने वहां भी जाकर प्रचार किया था। शीला ने कहा, दिल्ली में कांग्रेस विकास कार्यो के बल पर चुनाव जीतेगी। उसने गरीबों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों के लिए पर्याप्त कार्य किए हैं, वे किसी से छिपे नहीं हैं।

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'मैडम सोनिया आप मां हैं। कभी तो एक बार महंगाई के लिए दो शब्द बोल दीजिए। शीलाजी आप दादी बन गई हैं। कभी भूखे बच्चों के लिए कुछ बोल दीजिए।'

- नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री गुजरात।

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'गरीबी और बेरोजगारी के चलते लोग रोजगार के लिए दिल्ली में आए लेकिन उन पर कांग्रेस व भाजपा की सरकारों ने कोई ध्यान नहीं दिया।'

- मायावती, बसपा प्रमुख।

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'अगर नरेंद्र मोदी का प्रभाव होता तो कर्नाटक में भाजपा नहीं हारती। मोदी ने वहां भी जाकर प्रचार किया था।'

- शीला दीक्षित, मुख्यमंत्री दिल्ली।

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