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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 06, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

भूमि अधिग्रहण बिना नई लाइन नहीं बिछाएगा रेलवे

By Kishor JoshiEdited By:
Published: Mon, 06 Nov 2017 10:18 AM (IST)

इस समय 70 फीसद जमीन मिलने के बाद रेलवे किसी भी परियोजना पर कार्य शुरू कर देता है।

भूमि अधिग्रहण बिना नई लाइन नहीं बिछाएगा रेलवे
भूमि अधिग्रहण बिना नई लाइन नहीं बिछाएगा रेलवे

नई दिल्ली (पीटीआई)। रेलवे ने पहली बार निर्णय किया है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हुए बिना नई रेल लाइन बिछाने की कोई भी परियोजना शुरू नहीं की जाएगी। यह निर्णय इसलिए किया गया है, ताकि जमीन की अनुपलब्धता के कारण कोई भी परियोजना बीच में ही न अटक जाए।

रेलवे ने भूमि अधिग्रहण पूरा होने या निर्धारित समय सीमा के भीतर जमीन देने के लिए राज्य सरकार से लिखित गारंटी मिले बिना एक तरह से नई परियोजना शुरू करने पर रोक लगा रखी है। नई नीति में कहा गया है कि रेलवे बोर्ड ने भूमि अधिग्रहण होने के बाद ही नई लाइन को लेकर टेंडर जारी करने या काम शुरू करने का निर्णय लिया है। इस समय किसी परियोजना को शुरू करने के लिए केवल 70 फीसद भूमि अधिग्रहण की जरूरत है। इसके चलते जमीन नहीं मिलने या मुकदमेबाजी में फंसे होने के कारण अक्सर परियोजना रुक जाती है या उसमें देर हो जाती है।

अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान नीति में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अधिग्रहीत लाइन का रेखीय (लीनियर) होना जरूरी है। ऐसे में जब काम शुरू होता है, तब समस्याएं शुरू होती हैं। आंशिक काम तो शुरू हो जाता है, लेकिन अगले खंड के लिए जमीन उपलब्ध नहीं होती है।

एक अधिकारी ने बताया कि नई नीति के अनुसार, अगर राज्य सरकार नई रेल लाइन चाहती है, तो इसके लिए उसे रेलवे को भूमि उपलब्ध करानी होगी। अगर भूमि उपलब्ध नहीं होती है, तो हमें निवेश में नुकसान उठाना पड़ता है। हर साल ऐसे विलंब के कारण लागत में करीब 10-15 फीसद की बढ़ोतरी हो जाती है।

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