यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 16, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
राहुल को चुनाव की कमान, लेकिन पीएम उम्मीदवार नहीं
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी आम चुनाव में भाजपा के नरेंद्र मोदी से सीधे मुकाबला तो करेंगे, लेकिन सीधी तुलना से ...और पढ़ें

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी आम चुनाव में भाजपा के नरेंद्र मोदी से सीधे मुकाबला तो करेंगे, लेकिन सीधी तुलना से बचेंगे। यही कारण है कि कांग्रेस भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार मोदी के सामने राहुल को सीधे पीएम प्रत्याशी घोषित करने से बची। लेकिन चुनावी अभियान की कमान उनके हाथ में देकर अगले चुनाव में उन्हें चेहरा जरूर घोषित करने का फैसला कर लिया है। कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में राहुल को पीएम प्रत्याशी घोषित किए जाने के शोर को खुद पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हस्तक्षेप कर दबा दिया। बाद में राहुल ने भी कहा कि सामने बेहद कठिन संघर्ष है, उसमें वह पार्टी के लोगों के साथ लड़ेंगे और चुनाव बाद पार्टी जो कहेगी वह जिम्मेदारी वहन करने को तैयार हैं।
पीएम प्रत्याशी भले ही राहुल न घोषित हुए हों, लेकिन शुक्रवार को कांग्रेस कार्यकारिणी की बैठक में आ रहे प्रस्ताव में आम चुनाव की कमान उनके हाथ में होने का प्रमुखता से जिक्र होगा। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत कांग्रेस कार्यसमिति की विस्तारित बैठक में सबकी निगाहें राहुल गांधी की भूमिका को लेकर ही थी। जैसे ही बैठक शुरू हुई, कांग्रेस महासचिव बीके हरिप्रसाद ने राहुल को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने की मांग की। केरल कांग्रेस अध्यक्ष रमेश चेन्निथला, छत्तीसगढ़ से अजित जोगी समेत अन्य नेताओं ने भी यही मांग की।
राहुल फॉर पीएम का शोर तेजी पकड़ ही रहा था कि खुद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी खड़ी हुईं और हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में प्रधानमंत्री घोषित करने की परंपरा नहीं है और राहुल गांधी चुनाव अभियान का नेतृत्व करेंगे। इस पर पश्चिम बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष प्रदीप भंट्टाचार्य ने कहा कि फिर इसका जिक्र राष्ट्रीय कार्यकारिणी में आने वाले प्रस्ताव में होना चाहिए।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने इसका समर्थन किया। इसके बाद तय हो गया कि शुक्रवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में यह प्रस्ताव आएगा।
इस दौरान कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी कहा कि अभी विचारधारा की लड़ाई है। मुकाबला कड़ा है। आप लोगों के साथ रहकर इस लड़ाई को लड़ना चाहता हूं, चुनाव बाद जो पार्टी कहेगी वह जिम्मेदारी निभाने को तैयार हूं। जाहिर है कि कार्यसमिति में दिग्विजय सिंह और जयराम रमेश जैसे टीम राहुल के करीबी नेताओं की ही चली। पार्टी का एक बड़ा वर्ग राहुल को पीएम पद का उम्मीदवार घोषित करना चाहता था, लेकिन टीम राहुल खुद इसके पक्ष में नहीं थी।
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राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने की घोषणा को लेकर पूछे गए प्रश्न के जवाब में फर्नाडिस ने कहा कि सिर्फ कल तक का इंतजार करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे को लेकर वरिष्ठ नेताओं में किसी प्रकार का कोई मतभेद नहीं है। इस बात को लेकर सभी बहुत खुश हैं।
गौरतलब है कि ऐसी रिपोर्टे हैं कि पार्टी में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार घोषित करने को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में एक राय नहीं है। कुछ नेता जहां इस बात की घोषणा चुनाव से पूर्व करने के पक्ष में हैं तो कुछ इस पर सावधानी बरतने के पक्षधर हैं।
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