विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 10, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कर्नाटक का सीएम दिल्ली से भेजने के खिलाफ हैं राहुल

By Edited By:
Published: Fri, 10 May 2013 08:22 AM (IST)Updated: Fri, 10 May 2013 08:25 AM (IST)

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की चली तो कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में किसी दिल्ली के नेता को नहीं भेजा ...और पढ़ें

News Article Hero Image

जागरण ब्यूरो। नई दिल्ली। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की चली तो कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में किसी दिल्ली के नेता को नहीं भेजा जाएगा। ऐसे में दोनों केंद्रीय मंत्रियों वीरप्पा मोइली और मल्लिकार्जुन खड़गे के बजाय कर्नाटक विधानसभा में नेता विपक्ष रहे सिद्दरमैया को कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनाने की संभावनाएं मजबूत हो रही हैं। हालांकि, उनके नाम पर भी सहमति नहीं बन पा रही है और अगले दो दिनों में कांग्रेस के पर्यवेक्षक के तौर पर वरिष्ठ नेता एके एंटनी और अंबिका सोनी बेंगलूर भेजे जा रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, पिछड़े वर्ग के नेता सिद्दरमैया को मुख्यमंत्री पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। गुरुवार को बेंगलूर स्थित आवास पर सिद्दरमैया ने दावा किया है उन्हें सभी नवनिर्वाचित विधायकों का समर्थन प्राप्त है। उनके अलावा कर्नाटक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और दलित नेता जी परमेश्वर भी दावेदार थे, लेकिन वह अपना चुनाव ही हार गए। ऐसे में कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय रहे सिद्दरमैया अकेले बड़े नेता हैं। मगर उनके मूलत: कांग्रेसी न होने का मुद्दा उछाल दिया गया। वह दो बार कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं।

जनता दल में विभाजन के बाद वह एचडी देवगौड़ा की पार्टी जेडी (एस) में चले गए। 2006 में वह वापस कांग्रेस में आ गए और 2008 में विधानसभा में विपक्ष के नेता बन गए। कांग्रेस के प्रति निष्ठा के सवाल पर अपने खिलाफ यह माहौल बनता देख सिद्दरमैया ने दिल्ली आने का फैसला कर लिया। मगर कांग्रेस नेतृत्व की तरफ से उन्हें बेंगलूर में ही रुकने को कहा गया। साथ ही आश्वासन दिया गया कि उनके साथ न्याय होगा। दरअसल, यहां वीरप्पा मोइली और मल्लिकार्जुन खड़गे के नाम बेहद तेजी से उभरे थे। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी दिल्ली से किसी को मुख्यमंत्री बनाकर भेजे जाने के पक्ष में नहीं हैं। राहुल का कहना है कि जिन लोगों ने प्रदेश की राजनीति में विपक्ष में रहकर संघर्ष किया, उन्हें ही मौका मिलना चाहिए। हालांकि, कांग्रेस का एक खेमा बहुत सोच-समझकर व्यावहारिक फैसला लेने का हिमायती है। वैसे भी कांग्रेस कर्नाटक में मिली इतनी बड़ी जीत को गलत फैसले से नहीं गंवाना चाहती।

लोस चुनाव तक पार्टी के पक्ष में राज्य में यह माहौल बनाए रखना भी चुनौती है। यदि यहां कलह उभरी तो न सिर्फ राज्य में, बल्कि देश में गलत संदेश जाएगा। इसीलिए, पार्टी ने अपने दो वरिष्ठतम नेताओं रक्षामंत्री एके एंटनी और अंबिका सोनी को बेंगलूर भेजने का फैसला किया है। अभी भी सभी स्थितियों पर मंथन जारी है और उम्मीद है कि शुक्रवार शाम तक आलाकमान किसी निष्कर्ष तक पहुंच सकेगा।

मोबाइल पर ताजा खबरें, फोटो, वीडियो व लाइव स्कोर देखने के लिए जाएं m.jagran.com पर