यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 07, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मतदाताओं की नाराजगी पर बिफरे राहुल बोले, फिर कमल को ही वोट दे दो
अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी में मतदान के दौरान बूथों के निरीक्षण को निकले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को असहज स्थिति ...और पढ़ें

अमेठी [जागरण संवाददाता]। अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी में मतदान के दौरान बूथों के निरीक्षण को निकले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। तिलोई के चिलूली तथा फूला गांव के मतदान केंद्रों पर ग्रामीणों ने खराब रास्तों व क्षेत्रीय विधायक मोहम्मद मुस्लिम को लेकर नाराजगी जता दी। इससे गुस्साए राहुल ने कहा कि तुम लोग कमल को वोट दे दो और गाड़ी में बैठ गए।
विरोध में ग्रामीणों ने नारेबाजी शुरू कर दी। चिलौली गांव में भी राहुल को ग्रामीणों का गुस्सा झेलना पड़ा। गांव के वयोवृद्ध कांग्रेसी अंबिका शरण सिंह ने बुजुर्ग कांग्रेसियों की उपेक्षा का आरोप सीधे राहुल पर लगाया और कहा कि जो किया है अब उसे तुम ही झेलोगे। फूला गांव के लिए जब रास्ता पूछा गया तो ग्रामीणों ने पूरे दुंदा होते हुए कच्चे रास्ते से भेज दिया। जिसके चलते मुश्किल से राहुल वहां पहुंच सके।
सन 2004 के बाद मतदान के दिन अमेठी में पहली बार घूमे राहुल गांधी के लिए निश्चित रूप से बुधवार का दिन चुनौतीपूर्ण था। वह कई पोलिंग बूथ पर अंदर तक गए और वहां के हालात को देखा। स्कूल में बने बूथ में एक जगह वह ब्लैक बोर्ड पर अनगढ़ सा कमल का फूल देखकर नाराज हो गए और उसे मिटवाया। जब उनसे पूछा गया कि वह कुछ तनावग्रस्त लग रहे हैं तो उन्होंने खुद को सामान्य दिखाने की कोशिश में हंसकर दिखाया और दावा किया कि पिछले बार से ज्यादा वोटों से इस बार का चुनाव जीतेंगे।
इतना ही नहीं सब कुछ ठीक-ठाक दिखाने की मंशा से उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर चाय भी पी। गर्मी और तनाव के बीच ताजगी लाने की नीयत से उन्होंने हैंडपंप चलवाकर उसके ताजे पानी से मुंह भी धोया।
हाल के चुनावों में अमेठी में संभवत: पहली बार ऐसा दृश्य था कि मतदान वाले दिन राहुल गांधी समेत तीन प्रत्याशी क्षेत्र में घूम रहे थे और तीनों के दावे जीतने के थे। उन्हें जनता से भी खासा समर्थन मिल रहा था। इस सबके चलते प्रशासन को भी खासी मशक्कत करनी पड़ रही थी। इस दौरान भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी की शिकायत के चलते जिला मजिस्ट्रेट को कांग्रेस पक्ष की प्रियंका गांधी की निजी सहायक को जिले से बाहर भेजना पड़ा, वहीं आप प्रत्याशी कुमार विश्वास की शिकायतों की असलियत जानने के लिए सरकारी अमले को कई बार फिजूल की कवायद भी करनी पड़ी।
