ग्राम पंचायतों को सशक्त करेगी ग्राम स्वराज योजना, 7 हजार करोड़ से ज्यादा होंगे खर्च
केंद्रीय कैबिनेट ने प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना को मंजूरी दी है, जिसके तहत 2026-27 से 2030-31 तक 7,395.55 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

ग्राम पंचायतों को सशक्त करेगी ग्राम स्वराज योजना
HighLights
ग्राम स्वराज योजना को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिली।
7,395.55 करोड़ रुपये का बजट, 2026-31 तक लागू।
पंचायतें अब गांव के विकास की योजनाएं बनाएंगी।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। ग्राम पंचायतें अब सिर्फ सरकारी योजनाओं को लागू करने वाली इकाई नहीं रहेंगी, बल्कि गांव के विकास की योजनाएं तैयार करने और उसे आगे बढ़ाने में भी सक्षम होंगी।
अपनी जरूरत के हिसाब से योजनाएं तय करेंगी। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना को मंजूरी दी है। 2026-27 से 2030-31 तक चलने वाली इस योजना पर कुल 7,395.55 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
देश की 2.55 लाख से अधिक पंचायतों के लगभग 32 लाख जनप्रतिनिधियों और पंचायत-कर्मियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। यह विकसित भारत की कल्पना के अनुरूप अगली पीढ़ी की शासन व्यवस्था में बदलाव की पहल है।
कैबिनेट की बैठक के बाद सूचना प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि योजना पर होने वाले खर्च में केंद्र सरकार 4,869.48 करोड़ रुपये और राज्य सरकारें 2,526.07 करोड़ रुपये देंगी।
सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा। जहां सामान्य ग्राम पंचायतें नहीं हैं, वहां पारंपरिक स्थानीय निकाय इसके दायरे में आएंगे। योजना के लिए स्थायी पद नहीं बनाया जाएगा, हालांकि जरूरत के अनुसार राज्य, जिला और प्रखंड स्तर पर संविदा पर तकनीकी कर्मचारी रखे जा सकेंगे।
वैष्णव ने बताया कि अभी तक कई योजनाओं में पहले से तय रहता है कि किस तरह का काम करना है। किंतु नई योजना में हर साल 2.55 लाख ग्राम पंचायत विकास योजनाएं तैयार करने में मदद दी जाएगी।
इसके लिए ई-ग्राम स्वराज पोर्टल का इस्तेमाल होगा। इस पर गांव की जरूरतों, केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं तथा धन का ब्योरा एक साथ जोड़ने की कोशिश होगी।
इससे पंचायतों को यह समझने में आसानी होगी कि गांव में कहां विकास की कमी है और उसे दूर करने के लिए किन योजनाओं या संसाधनों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
स्थानीय प्राथमिकताओं के आधार पर ही तय होगा कि किस गांव में किस काम की ज्यादा जरूरत है। अगर किसी गांव में पेयजल, सड़क या दूसरी बुनियादी सुविधाओं की कमी है तो पंचायत उपलब्ध योजनाओं और धन की जानकारी के आधार पर प्राथमिकताएं तय कर सकेगी।
विभिन्न विभागों के बीच तालमेल बढ़ाने पर जोर रहेगा, ताकि उपलब्ध धन का बेहतर इस्तेमाल हो और विकास के कामों में दोहराव या कमी की गुंजाइश घटे। सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों, पंचायतकर्मियों और दूसरे संबंधित लोगों को हर साल क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण और डिजिटल माध्यमों से सहायता दी जाएगी, ताकि उन्हें योजना निर्माण, संसाधनों का ब्योरा रखने एवं ग्रामीणों से संवाद करने में सहूलियत हो सके।
योजनाओं की जानकारी देने के लिए ग्राम सभाओं, पंचायत बैठकों और डिजिटल मंचों का इस्तेमाल किया जाएगा। प्रत्येक जागरूकता अभियान के जरिए कम से कम एक करोड़ लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य है। पंचायतों को अपने स्रोतों से आमदनी बढ़ाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि वे केवल अनुदान पर निर्भर न रहें।
