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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 04, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

शरीफ के वादों को पाक सेना ने फिर दिखाया ठेंगा

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Published: Fri, 04 Oct 2013 05:39 AM (IST)Updated: Fri, 04 Oct 2013 06:22 AM (IST)

पाकिस्तान की सेना पर प्रधानमंत्री और देश के रक्षा मंत्री की भी जिम्मेदारी संभाल रहे नवाज शरीफ का कितना नियंत्रण ...और पढ़ें

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नई दिल्ली, [प्रणय उपाध्याय]। पाकिस्तान की सेना पर प्रधानमंत्री और देश के रक्षा मंत्री की भी जिम्मेदारी संभाल रहे नवाज शरीफ का कितना नियंत्रण है, इसका नमूना जम्मू-कश्मीर के केरन सेक्टर में पाकिस्तानी घुसपैठ ने दिखा दिया। भारत के साथ संबंध सुधार के इरादे से शरीफ के 24 सितंबर को वतन छोड़ते ही पाक सेना की देखरेख में घुसपैठियों ने भारतीय सीमा में घुसपैठ कर मोर्चा संभाल लिया। ऐसे में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ न्यूयार्क में हुई हालिया मुलाकात के दौरान शरीफ की ओर से सीमा पर शांति बहाली के लिए किए वादे अब मजाक नजर आ रहे हैं।

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शरीफ के साथ पाक सेना के रिश्तों और उनके सत्ता में रहते 1999 में हुए कारगिल युद्ध के इतिहास के मद्देनजर केरन सेक्टर में हुई घुसपैठ को सामान्य नहीं माना जा रहा। खासतौर पर उसके वक्त को देखते हुए। शरीफ 1999 में छूटी संबंध सुधार की डोर थामने की बात कहते हुए पाकिस्तान से 24 सितंबर को अमेरिका पहुंचे थे। वहीं 24 व 25 सितंबर की रात ही पाकिस्तान की ओर से हथियार बंद घुसपैठिये दस्तों ने नियंत्रण रेखा लांघ भारतीय हद में मोर्चा बांधा। इन दस्तों में पाकिस्तानी सेना के कमांडो के शामिल होने की आशंका भारतीय सेना जता रही है। गौरतलब है कि शरीफ-मनमोहन मुलाकात के बाद सीमा पर शांति बहाली को प्राथमिकता बताया गया था।

ताजा घुसपैठ व आतंकी घटनाओं को जून में चुनावों के बाद प्रधानमंत्री बने नवाज शरीफ पर पाक सेना की ओर से दबाव का पैंतरा भी माना जा रहा है। शरीफ सरकार को अगले महीने तीन सेवा विस्तारों के बाद रिटायर होने जा रहे सेना प्रमुख जनरल अशफाक परवेज कियानी का उत्तराधिकारी ढूंढ़ना है। भारतीय रणनीतिक जानकारों के अनुसार शरीफ के लिए यह फैसला आसान नहीं होगा। मिलिट्री इंटेलीजेंस के पूर्व अधिकारी और रणनीतिक विश्लेषक सुभाष कपिला कहते हैं कि शरीफ जिस तरह चुनाव अभियान से लेकर अब तक भारत के साथ संबंध सुधार व पाक सेना पर लोकतांत्रिक सरकार के पूर्ण नियंत्रण की बात करते रहे हैं, वह स्वाभाविक तौर पर पाकिस्तानी सेना के नीति नियंताओं को रास नहीं आ रही है। उल्लेखनीय है कि 1999 में पाक सेना ने तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को अपनी कारगिल योजना से बेखबर रखा था।

भाजपा को हमले का मौका

इस बीच सवाल हैं कि आखिर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने केरन में घुसपैठ की जानकारी के बावजूद शरीफ से हुई अपनी मुलाकात में मामले को उठाया या नहीं? या फिर उन्हें इस बारे में सही तस्वीर की जानकारी नहीं थी। शरीफ से मुलाकात का पहले से विरोध कर रही भाजपा को इसने मौका दे दिया है। पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावडे़कर ने कहा कि पीएम जब शरीफ से दोस्ती का हाथ मिला रहे थे तो पाक घुसपैठिये भारतीय हद में गोलीबारी कर रहे थे।

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