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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 26, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

दिल्ली में खुलेआम बिक रहा 'मौत का सामान'

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Published: Tue, 26 Aug 2014 08:25 AM (GMT+05:30)Updated: Tue, 26 Aug 2014 08:32 AM (GMT+05:30)

हाथों में कट्टा एवं चाकू लहराते युवक एक बाइक सवार को रोकते हैं और फिर दिनदहाड़े चाकू से हमला कर ...और पढ़ें

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दक्षिणी दिल्ली, [संजीव कुमार मिश्र]। हाथों में कट्टा एवं चाकू लहराते युवक एक बाइक सवार को रोकते हैं और फिर दिनदहाड़े चाकू से हमला कर उसकी हत्या कर देते हैं। अगस्त के प्रथम सप्ताह में हुई यह वारदात सीसीटीवी फुटेज में कैद हो गई थी। पूरे देश ने देखा कि किस तरह मदनगीर में नाबालिग लड़कों ने हत्या की वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने आरोपियों को पकड़कर हत्या में प्रयुक्त हथियार भी बरामद कर लिए थे। लेकिन पुलिस के कान उस समय खड़े हो गए जब जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि मदनगीर, दक्षिणपुरी, संगम विहार, अंबेडकर नगर के कुछ इलाकों में घंटे के रेट पर आसानी से हथियार मुहैया कराए जा रहे हैं।

दक्षिणी दिल्ली का 'बदनाम' इलाका

पूर्वी दिल्ली में त्रिलोकपुरी, कल्याणपुरी, सीलमपुर, उस्मानपुर, बाहरी दिल्ली में मंगोलपुरी, प्रशांत विहार व पश्चिमी दिल्ली में नांगलोई, विकासपुरी, तिलक नगर जैसे इलाकों में अपराध बढ़ते जा रहे हैं। ये इलाके दिल्ली के बदनाम इलाके बन चुके हैं जहां न केवल गैंगवार बल्कि अपहरण, महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा, चोरी, झपटमारी जैसी वारदात लगातार बढ़ रही हैं। दक्षिणी दिल्ली में मदनगीर, संगम विहार आदि इलाकों में भी आपराधिक वारदात का ग्राफ बढ़ा है। यहां शाम होते ही अपराध होने का खतरा बढ़ जाता है। वर्तमान में दक्षिणी दिल्ली में छह से ज्यादा ऐसे गिरोह सक्रिय हैं जो नाबालिगों से आपराधिक वारदात करवाते हैं। इन गिरोहों की कमाई का एक बड़ा जरिया दुकानदारों एवं प्रापर्टी डीलरों से रंगदारी वसूलना है।

एक फोन पर मिल जाते हैं हथियार

दक्षिणी-पूर्वी दिल्ली के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इलाके में हुए पिछले कुछ अपराधों को देखें तो यहां देशी कट्टे, पिस्टल का ज्यादा प्रयोग हुआ है। ये हथियार फरीदाबाद, मेरठ से आसानी से मंगाए जाते हैं। बस एक फोन पर तस्कर हथियार पहुंचा देते हैं। इतना ही नहीं मदनगीर में तो इनका व्यापार भी हो रहा है। मसलन एक घंटे के लिए कट्टा किराए पर लेने के लिए 1000 रुपये और इतने ही समय के लिए पिस्टल प्रयोग करने के करीब 3 हजार रुपये लगते हैं।

नाबालिगों को विशेष ट्रेनिंग

पुलिस सूत्रों की मानें तो अपराध की दुनिया के शातिर खिलाड़ी आपराधिक वारदात को अंजाम देने के लिए नाबालिग लड़कों का इस्तेमाल कर रहे हैं। गैंग में शामिल करने से पहले उन्हें बाकायदा ट्रेनिंग दी जाती है। उनसे बस में झपटमारी, जेबतराशी, चोरी एवं सेंधमारी जैसी घटनाओं को अंजाम देने के लिए कहा जाता है।

इस दौरान गिरोह का एक सदस्य नाबालिग के साथ होता है। पुलिस के मुताबिक गैंग का कोई भी सदस्य अगर जेल जाता है तो उसकी जमानत से लेकर घर तक का सारा खर्चा गैंग ही वहन करता है। नाबालिगों को इस्तेमाल करने का बड़ा कारण यह है कि उन्हें सजा कम मिलती है। ऐसे में किशोरों के लिए पैसा कमाने का यह सबसे आसान रास्ता बन जाता है। मदनगीर में देवा नाम का शख्स गिरोह का काम देखता है।

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