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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 10, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

नोट पर बैन: छह महीने से चल रहा था पीएम मोदी का सीक्रेट प्लान

By Manish NegiEdited By:
Published: Thu, 10 Nov 2016 04:50 PM (IST)Updated: Thu, 10 Nov 2016 05:04 PM (IST)

वित्त मंत्रालय से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो इसकी योजना फुलप्रूफ बनाई गई थी, कि नई करेंसी छपकर ...और पढ़ें

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नई दिल्ली, (अरविंद पांडेय)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच सौ और एक हजार के सभी पुराने नोटो को बंद करने की जिस अंदाज में घोषणा की, वह थोड़ी चौंकाने वाली भले थी, लेकिन आनन-फानन में लिया गया फैसला कतई नहीं था।

इस योजना को फुलप्रूफ तरीके से अंजाम दिया गया, ताकि ब्लैक मनी इकट्ठा करने वाले लोगों को सोचने का कोई मौका न मिल सके। जानकारों की मानें तो इस पूरी योजना पर तकरीबन छह महीने से काम चल रहा था। जिसकी जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक के कुछ ही आला अफसरों को थी। जो कि इस पूरे योजना को बजट जैसे सीक्रेट अंदाज में कर रहे थे।

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वित्त मंत्रालय से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो इसकी योजना फुलप्रूफ बनाई गई थी, कि नई करेंसी छपकर बैंक तक पहुंचाए जाने के बाद भी किसी को कानो-कान पता नहीं लग सका। वहीं योजना के तहत दो हजार और पांच सौ की नई करेंसी देश के ज्यादातर बैंकों के पास जब पहुंच गई। हालांकि सभी बैंकों को यह खास हिदायत दी गई थी कि अभी इस करेंसी का इस्तेमाल नहीं किया जाना है। इस बीच एक हजार और पांच सौ के पुराने नोटों की बैंक सप्लाई को थोड़ा स्लो कर दिया गया था। ताकि बैंकों के पास पुराने नोट ज्यादा जमा न होने पाए।

खास बात यह है कि बैंकों को दो हजार और पांच सौ की जो करेंसी भेजी गई थी, उन बॉक्सों को हाईटेक बारकोडिंग सिस्टम से सील किया गया था, ताकि इसे कोई खोल न सके। सूत्रों की मानें तो रिजर्व बैंक के अधिकारियों को इसकी औचक जांच के लिए भी लगाया गया था।

सूत्रों की मानें तो जैसे ही योजना के तहत पूरा इंतजाम कर लिया गया, इसके बाद ही पीएमओ को जानकारी दी गई। जिसके बाद पीएम ने यह ऐलान किया। बता दें कि पांच सौ व एक हजार के नोटों को बंद करने का यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कालाधन के खिलाफ मुहिम का एक हिस्सा था, जिसके तहत पहले विदेश से कालाधन को वापस लाने और फिर देश में जमा कालेधन को जमा करने के लिए भी अभियान चलाया गया था।

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