यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 18, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
क्या कांग्रेस का दामन थामेंगे नीलेकणि?
आये दिन कांग्रेस सरकार भ्रष्टाचार और घोटालों के आरोप से घिरी रहती है। ऐसे में कांग्रेस को ऐसा चेहरा चाहिए ...और पढ़ें

नई दिल्ली। आये दिन कांग्रेस सरकार भ्रष्टाचार और घोटालों के आरोप से घिरी रहती है। ऐसे में कांग्रेस को ऐसा चेहरा चाहिए जो लोगों के बीच जाना पहचाना हो, साथ ही जिसका दामन साफ हो। इसके लिए नंदन नीलेकणि से बेहतर और कौन हो सकता है।
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सरकार की ओर से इंफोसिस के पूर्व सीईओ और विशिष्ट पहचान पत्र प्राधिकरण (यूआईडी) के अध्यक्ष नंदन नीलेकणि को चुनाव के लिए टिकट दिया जा सकता है। माना जा रहा है कि नीलेकणि जल्द ही कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं। 2012 में फोर्ब्स मैगजीन की ओर से सबसे अमीर भारतीयों में शुमार किये गये नीलेकणि अपने गृह राज्य कर्नाटक से लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। खबर यह भी है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने खुद नीलेकणि के समक्ष उनकी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने की पेशकश की है।
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कांग्रेस और नीलेकणी दोनों ने अभी तक इस खबर पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन कांग्रेस सूत्रों का दावा है कि नीलेकणि के चुनाव लड़ने की पूरी उम्मीद है। वैसे तो कांग्रेस को इस बात का पूरा भरोसा है कि नीलेकणि लोकसभा चुनाव लड़ेंगे, लेकिन पार्टी ने राज्यसभा का रास्ता भी खुला रखा है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि नीलेकणि के चुनाव लड़ने पर अंतिम फैसला नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद ही लिया जाएगा। बहरहाल, टेक्नोक्रेट नीलेकणि के पॉलिटिक्स में आने की खबर से कर्नाटक कांग्रेस में खुशी की लहर दौड़ गई है। बताया जा रहा है कि उन्हें दक्षिण बेंगलुरू से चुनाव लड़ने की पेशकश की गई है। इस सीट को कांग्रेस की दृष्टि से सुरक्षित सीट माना जाता है।
सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि नीलेकणि का इस प्रस्ताव पर रुख सकारात्मक है और वह राजनीति में कदम रखने के लिए तैयार हैं। उल्लेखनीय है कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव में मिली जीत के साथ ही राज्य में कांग्रेस पहले की तुलना में काफी मजबूत हुई है। चूंकि नीलेकणि की न केवल छवि साफ सुथरी है, बल्कि वह आईटी क्षेत्र में दुनिया के जाने माने नाम हैं, इसलिए पार्टी उनके नाम और छवि का उपयोग करना चाहती है। यही कारण है कि राहुल गांधी ने खुद उनसे चुनाव लड़ने की पेशकश की।
वह 2002 से 2007 तक इंफोसिस के सीईओ भी रहे। इसके अलावा वह केंद्र सरकार के विशिष्ट पहचान पत्र प्राधिकरण (यूआईडी) के चेयरमैन के तौर भी कार्य कर रहे हैं। नीलेकणि को फोर्ब्स मैगजीन ने 2012 में सबसे अमीर भारतीयों की सूची में शुमार किया था।
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