यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 27, 2012 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
आधे को आधार, आधे को एनपीआर
कैबिनेट समिति ने शुक्रवार को यूआईडीएआई अधिकार पत्र का विस्तार करते हुए 40 करोड़ अधिक विशिष्ट पहचान पत्र [यूआईडी] बनाए जाने को मंजूरी दी।

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। आधार कार्ड पर गृह मंत्रालय, योजना आयोग और विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के बीच छिड़ी रार को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने बीच का रास्ता निकाला है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में विशिष्ट पहचान प्राधिकरण [यूआइडीएआइ] योजना पर कैबिनेट समिति की बैठक में प्राधिकरण को देश की और 40 करोड़ जनता का आधार कार्ड बनाने की अनुमति दे दी गई है। इसके साथ ही प्राधिकरण के लिए लगभग 5800 करोड़ रुपये और मंजूर किए गए हैं।
कैबिनेट के फैसले का मतलब हुआ कि देश की आधी आबादी [60 करोड़] का बायोमेट्रिक डाटा [अंगुली व आंख की पुतली के निशान] जुटाने का काम यूआइडीएआइ करेगी जबकि शेष बची आबादी के लिए यह काम राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर [एनपीआर] के तहत किया जाएगा। कैबिनेट के फैसले के मुताबिक 17 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की जनता का बायोमेट्रिक डाटा यूआइएडीआइ करेगी। अन्य राज्यों में गृह मंत्रालय की एनपीआर परियोजना के तहत शामिल किया जाएगा। वैसे जनवरी, 2009 के कैबिनेट के फैसले के मुताबिक पूरे देश के नागरिकों का आधार कार्ड बनना था।
गृहमंत्री पी चिदंबरम ने बताया कि इस फैसले से बायोमेट्रिक डाटा जुटाने में दोहराव नहीं होगा। एनपीआर प्रक्रिया के तहत वैसे हर नागरिक से यह पूछा जाएगा कि उसके आधार कार्ड हैं या नहीं। अगर आधार कार्ड नहीं होगा तभी उसका बायोमेट्रिक डाटा इकट्ठा किया जाएगा।
चिदंबरम ने बताया कि मुख्य मुद्दा यह था कि बायोमेट्रिक डाटा जुटाने में दोहराव न हो। कैबिनेट का फैसला ऐसा होने से रोकेगा। चूंकि एनपीआर पूरे देश के लिए तैयार हो रहा है। वहां जो भी नागरिक आएगा उससे यह पूछा जाएगा कि उसे आधार नंबर मिला है या नहीं। आधार नंबर वाले नागरिका का दोबारा बायोमेट्रिक डाटा नहीं लिया जाएगा। जिन नागरिकों को आधार नंबर नहीं मिला है उन्हें एनपीआर के जरिए यह नंबर मिलेगा।
गृह मंत्रालय ने आधार कार्ड को लेकर सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी उठाए थे। कैबिनेट की बैठक में इसका कोई ठोस समाधान निकला हो, ऐसा तो नहीं कहा जा सकता लेकिन यूआइडीएआइ के अध्यक्ष नंदन नीलेकणी ने आश्वासन दिया है कि गृह मंत्रालय की तरफ से जो भी मुद्दे उठाए गए हैं, उनका अगले चरण में समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी। चिदंबरम ने बताया कि आधार संख्या के लिए जो पांच जानकारियां ली जाती हैं वे सुरक्षा मुद्दों के लिहाज से पर्याप्त हैं। वैसे एनपीआर के तहत नागरिकों से संबंधित 15 तरह की जानकारियां एकत्रित की जाती हैं। एनपीआर के आधार पर सरकार आगे राष्ट्रीय पहचान कार्ड जारी करेगी।
यूआइडीआएआइ और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर दोनो के काम में तेजी लाई जाएगी। दोनो एजेंसियों को अपना काम जून, 2013 तक पूरा करने का निर्देश दिया गया है। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार आगामी चुनावी से पहले अपनी इस महत्वाकांक्षी योजना को पूरा कर लेना चाहती है। यह भी एक बड़ी वजह है कि दोनो एजेंसियों को अपना-अपना काम करने जारी रखने को कहा गया है। नीलेकणी ने बताया कि फरवरी, 2012 तक 20 करोड़ नागरिकों को आधार संख्या देने का काम पूरा हो जाएगा। उसके बाद अप्रैल, 2012 से अगले चरण में 40 करोड़ नागरिकों के लिए प्रक्रिया शुरू की जाएगी। कैबिनेट की तरफ से यूआइडीएआइ के लिए 5791.74 करोड़ रुपये और मंजूर किए गए।
जिन राज्यों में काम करेगा यूआइडीएआइ :
आंध्र प्रदेश, चंडीगढ़, दामन व दिऊ, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, पुद्दुचेरी, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, राजस्थान
क्या है विवाद
यूआइडीएआइ ने वर्ष 2009 में काम शुरू किया। सभी नागरिकों को आधार संख्या दिया जाना था। लेकिन बाद में गृह मंत्रालय ने आधार कार्ड बनाने के तरीके को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए विरोध किया। वित्त मंत्रालय की स्थायी संसदीय समिति ने आधार संख्या बनाने की प्रक्रिया को रोकने की सिफारिश की। इसे कानूनी जामा पहनाने के लिए प्रस्तावित विधेयक को भी पेश नहीं किया गया। आधार परियोजना पर कुल 8814.75 करोड़ रुपये खर्च होने हैं।
मोबाइल पर ताजा खबरें, फोटो, वीडियो व लाइव स्कोर देखने के लिए जाएं m.jagran.com पर
