यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 17, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
काश! यहां तक लाने में इतनी देर न की गई होती..
पटना, जागरण संवाददाता। छपरा से रेफर बच्चों के इलाज के लिए पीएमसीएच में देर शाम से ही पूरी तैयारी कर ...और पढ़ें

पटना, जागरण संवाददाता। छपरा से रेफर बच्चों के इलाज के लिए पीएमसीएच में देर शाम से ही पूरी तैयारी कर ली गई थी। हालांकि पटना मेडिकल कालेज व अस्पताल के अधीक्षक अमरकांत झा अमर अफसोस कर रहे थे कि बच्चों को समय पर रेफर किया गया होता, तो इतनी मौतें नहीं होतीं। रात 12 बजे के बाद एक के बाद एक एंबुलेंस से बच्चों को पीएमसीएच पहुंचाया गया। खुद शिक्षा मंत्री पीके शाही अपनी देखरेख में एंबुलेंस के साथ पटना पहुंचे थे। शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव अमरजीत सिन्हा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी वहां मौजूद थे।
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पहले दौर में पहुंचे 28 बच्चों में से 10 की हालत बेहद गंभीर थी। वे बेहोशी की हालत में थे। डाक्टरों ने तुरंत उन्हें दवा एट्रोपेन 15-20 मिनट के अंतराल पर देनी शुरू की। फिर अन्य जांच शुरू हुई। डॉ. अमरकांत झा अमर ने भी माना कि फूड प्वाइजनिंग या कीटनाशक की वजह से बच्चों की ऐसी हालत की आशंका है। हालांकि अभी साफ तौर पर इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता।
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इसके पूर्व छपरा से जैसे ही सूचना मिली की बच्चों को पटना रेफर किया जा रहा है, पीएमसीएच की आपातकालीन टीम सतर्क हो गई। खुद अधीक्षक के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम मुस्तैद थी। पीएमसीएच को कड़े सुरक्षा घेरे में ले लिया गया। पत्रकारों तक को अंदर जाने की इजाजत नहीं दी जा रही थी। दुखद यह है कि बच्चों के साथ आये परिजनों का कोई पुरसाहाल नहीं था। परिसर में अभिभावक बदहवासी की हालत में बिना खाए-पिए इधर-उधर दौड़ रहे थे।
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