यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 18, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
INX Media Case: कार्ति चिदंबरम के खिलाफ SC में सुनवाई टली, जानिए क्या है मामला?
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अगली सुनवाई तक कार्ति के खिलाफ सीबीआइ का लुक आउट सर्कुलर जारी रहेगा।

नई दिल्ली, एएनआई। आईएनएक्स मीडिया केस में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिंदबरम पर सुनवाई 22 सितंबर तक के लिए टल गई है। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की सुनवाई 22 सितंबर को करेगा।आईएनएक्स मीडिया केस में आरोपी कार्ति चिदंबरम के देश से बाहर जाने पर रोक फिलहाल जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अगली सुनवाई तक कार्ति के खिलाफ सीबीआइ का लुक आउट सर्कुलर जारी रहेगा। बता दें कि सीबीआइ ने एक सितंबर को इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि उसके पास लुक आउट नोटिस जारी करने की ठोस वजहें हैं।
बता दें कि कार्ति पूर्व फाइनेंस और होम मिनिस्टर पी. चिदंबरम के बेटे हैं। उन पर पीटर मुखर्जी की कंपनी आईएनएक्स मीडिया को गलत तरीके से फायदा पहुंचाने के आरोप हैं। सीबीआइ ने कार्ति के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया हुआ है।
सीबीआइ के आरोप गलत
कार्ति चिदंबरम के खिलाफ सीबीआइ ने 15 मई को एफआईआर दर्ज की थी। सीबीआइ और ईडी कार्ति से पूछताछ करना चाहती थी लेकिन कार्ति उसने सामने पेश नहीं हो रहे थे। बाद में सीबीआइ ने कार्ति के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी कर दिया।
कार्ति ने इसे मद्रास हाईकोर्ट में चैलेंज किया। यहां से उन्हें स्टे मिल गया। लेकिन, सीबीआइ ने सुप्रीम कोर्ट के सामने मामला उठाया। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआइ की दलीलों को सही पाते हुए कार्ति को जांच एजेंसी के सामने पेश होने का ऑर्डर दिया। जांच एजेंसी दो बार कार्ति से पूछताछ कर चुकी है।
सोमवार को इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम. खानविलकर और जस्टिस डीवाय. चंद्रचूड की बेंच ने की। बेंच ने अपने ऑर्डर में कहा कि मद्रास हाईकोर्ट के ऑर्डर पर स्टे जारी रहेगा। इसका मतलब ये हुआ कि 22 सितंबर तक कार्ति देश से बाहर नहीं जा सकते।
दोनों तरफ से क्या दलीलें?
सुनवाई के दौरान कार्ति के वकील सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा कि सीबीआइ ने कार्ति पर जो आरोप लगाए हैं वो पूरी तरह बेबुनियाद है। उन्होंने कहा कि अगर जांच एजेंसी के पास कार्ति की किसी बेहिसाब प्रॉपर्टी के सबूत हैं तो वो पेश करे।
इस पर केंद्र के वकील एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा- जांच बहुत अहम दौर में है। सीबीआइ अब तक की जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को बंद लिफाफे में सौंप चुकी है। इसके बाद बेंच ने सुनवाई की अगली तारीख तय कर दी।
ये कोई साधारण केस नहीं
पिछली सुनवाई के दौरान एडिश्नल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच से कहा था- लुक आउट नोटिस जारी किए जाने की हमारे पास अच्छी और ठोस वजहें हैं। यह किसी एक कंपनी से जुड़ा साधारण केस नहीं है। इसमें अकाउंट्स और विदेशों में मौजूद प्रॉपर्टी के दस्तावेजों से खिलवाड़ की गई है।
कार्ति के वकील गोपाल सुब्रमण्यन ने कहा था- जांच का सब्जेक्ट मेरा मुवक्किल नहीं बल्कि उनके पिता हैं जो पूर्व फाइनेंस मिनिस्टर हैं। उन्होंने ही फॉरेन इन्वेस्टमेंट्स प्रमोशन बोर्ड के तहत एक कंपनी को 2007 में मंजूरी दी थी।
दूसरे माल्या साबित ना हों कार्ति
मद्रास हाईकोर्ट में 7 अगस्त को इस मामले की सुनवाई के दौरान सरकार ने कहा था- कार्ति चिदंबरम के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर इसलिए जारी किया गया है ताकि वो भी विजय माल्या की तरह देश छोड़कर ना भाग जाए।
क्या हैं आरोप?
कार्ति के पिता पी. चिदंबरम यूपीए सरकार में पहले होम और बाद फाइनेंस मिनिस्टर रह चुके हैं। सीबीआइ का आरोप है कि एक कंपनी जिस पर इनडाइरेक्टली कार्ति का कंट्रोल था, उसको इंद्राणी और पीटर मुखर्जी के मीडिया हाउस (आईएनएक्स मीडिया) से फंड ट्रांसफर हुआ। कार्ति के अलावा चार और लोगों को इस मामले में समन जारी किए गए थे। कार्ति और आईएनएक्स मीडिया के खिलाफ केस दर्ज किया जा चुका है।
आरोप है कि कार्ति ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके आईएनएक्स को फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट क्लीयरेंस हासिल करने में मदद की थी। इस मामले में उनके घर और ऑफिस पर कुछ महीने पहले छापे भी मारे गए थे। कार्ति ने कहा था कि केंद्र बदले की भावना से कार्रवाई कर रहा है।
ये समन 27 और फिर 29 जून को जारी किए गए थे। लेकिन, कार्ति ने जांच एजेंसियों से और वक्त की मांग की।
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