यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 10, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
राज्यसभा में प्रधानमंत्री ने कैबिनेट का कराया परिचय
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के अभिभाषण पर मंगलवार को चर्चा के दौरान राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट का परिचय ...और पढ़ें

नई दिल्ली। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के अभिभाषण पर मंगलवार को चर्चा के दौरान राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट का परिचय कराया। इससे पहले हिमाचल प्रदेश के मंडी में हुए हादसे पर राज्यसभा एवं लोकसभा में श्रद्धांजलि दी गई। लोकसभा में चर्चा के दौरान सत्ताधारी दल की ओर से भाजपा महासचिव एवं सांसद राजीव प्रताप रूडी ने अभिभाषण पर चर्चा करते हुए प्रस्ताव पेश किया। जबकि राज्यसभा में भाजपा उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने चर्चा की शुरुआत करते हुए प्रस्ताव रखा।
चर्चा के दौरान रूडी ने लोकसभा में कहा कि आम चुनावों शानदार जीत दर्ज करने वाली हमारी पार्टी सभी सांसदों की सुनेगी और सबको साथ लेकर चलेगी, हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दिल बहुत बड़ा है। रूडी ने लोकसभा में मौजूद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से कहा कि अगर आप सुझाव देंगी तो हम जरूर सुनेंगे। लेकिन हम भारत को ऐसे नहीं चलाएंगे, जैसे आपकी सरकार ने चलाया। भाजपा सांसद ने आम चुनावों में कांग्रेस के निराशाजनक प्रदर्शन का मामला भी उठाते हुए कहा कि पार्टी को अब तक की सबसे बुरी हार झेलनी पड़ी। कांग्रेस को सिर्फ 44 सीटें ही मिलीं, वह क्षेत्रीय पार्टी बनकर रह गई। यहां तक कि वह विपक्ष के नेता का पद पाने का अधिकार भी खो बैठी। उन्होंने कहा कि शपथ ग्रहण में 10 देशों के प्रमुखों का आना गौरव की बात है। उन्होंने कहा, अगले भाजपा नीत एनडीए सरकार अगले 10 वर्षो में देश का कायाकल्प करेगी।
रूडी ने चर्चा के दौरान देश में बिजली संकट का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बिजली संकट दूर करने सरकार की प्राथमिकता होगी। राजीव प्रताप रूडी ने देश में बेरोजगारी एवं गरीबी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने इस दौरान जम्मू-कश्मीर में विस्थापित नागरिकों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस देश में ऐसा कौन-सा कानून है कि जिससे तहत वहां का कोई नागरिक विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग नहीं कर सकता है, जबकि वह लोकसभा चुनाव के लिए मतदान कर सकता है। इसके साथ उन्होंने लोकतंत्र की खूबियों का जिक्र करते हुए कहा कि इस देश में लोकतंत्र की कामयाबी के अनेक उदाहरण हैं। उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर कहा कि लोकतंत्र की खासियत ही है कोई निर्दलीय विधायक किसी राज्य का ढाई साल तक मुख्यमंत्री बना रह सकता है। साथ ही जिन्हें जेल में होना चाहिए खुले घूम रहे हैं। जेल जाने और वहां से बाहर आने के बाद कोई सांसद अपनी बेटी और पत्नी को चुनाव में खड़ा करवाकर उन्हें जिताने का प्रयास करता है।
वहीं, चर्चा में अपनी बात रखते हुए लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान ने बिहार में शिक्षा के स्तर का मुद्दा उठाते हुए कहा कि एक शिक्षक को वहां छह हजार रुपये मासिक मिलता है। ऐसे में शिक्षा के स्तर को ऊपर कैसे उठाया जा सकता है। अल्पसंख्यक समुदाय की समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ दल मात्र हिंदू-मुसलमान की बात करते है। महिला आरक्षण पर उन्होंने कहा कि तमाम राजनीतिक दलों के समर्थन देने की बात करते रहने के बावजूद आज तक इस बिल को पारित क्यों नहीं कराया जा सका? रामविलास पासवान ने नदियों को जोड़ने का समर्थन करते हुए कहा कि जिस दिन यह काम पूरा हो जाएगा उन दिन सभी खेतों को पानी उपलब्ध हो जाएगा। रामविलास ने कहा कि देश में एक मजबूत प्रधानमंत्री का होना बहुत जरूरी है तभी हम कामयाब होंगे।
कांग्रेस की ओर से प्रस्ताव पेश करते हुए सांसद मल्लिार्जुन खड़गे ने संप्रग सरकार के कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यो का उल्लेख करते हुए कहा कि सिर्फ भाषणों से लोगों का पेट नहीं भर सकता है। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान वोट लेने के लिए भाजपा ने जो वादे किए उन्हीं वादों को राजग ने यहां पर दोहराया है। मनरेगा का उल्लेख करते हुए खड़ने ने कहा कि गरीबी उन्मूलन के लिए संप्रग सरकार का यह प्रयास सफल रहा है।
दूसरी ओर, सत्ताधारी दल की ओर से भाजपा उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने राज्यसभा में चर्चा की शुरुआत करते हुए प्रस्ताव रखा। इससे पहले राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होने के साथ ही बसपा सांसदों में बदायूं कांड का मामला उठाते हुए यूपी की सपा सरकार का विरोध करते हुए जमकर हंगामा किया। इसके कारण राज्यसभा को दस मिनट के लिए स्थगित कर दिया गया।
गौरतलब है कि सोमवार को संसद में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के अभिभाषण के जरिये सुशासन और राष्ट्र निर्माण का मोदी सरकार का एजेंडा सामने लाया गया। यह मोदी सरकार के अगले पांच साल का एजेंडा होने के साथ ही पूर्ववर्ती संप्रग सरकार की असफलता का श्वेतपत्र भी था। राष्ट्रपति ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी के समक्ष पुरानी सरकार की आर्थिक नाकामियों और राज्य सरकारों के साथ भेदभाव को गिनाकर मोदी सरकार के पांच साल का एजेंडा रखा। टीम इंडिया और ब्रांड इंडिया जैसे मोदी मंत्रों से लबरेज राष्ट्रपति के 50 बिंदुओं वाले अभिभाषण में शहरों से लेकर गांवों तक गुणवत्तायुक्त जीवन शैली, सबको काम और बिना भेदभाव के सुरक्षा केंद्र में थी। गंगा के पुनरुद्धार, प्रधानमंत्री सिंचाई योजना और 100 नए शहरों जैसे वादों के साथ मोदी सरकार ने वास्तव में अपने एक दशक का लक्ष्य जनता के सामने जाहिर कर दिया।
