यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 09, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
बसेंगे 100 नए शहर, बदलेगी गांव की सूरत
आजादी की हीरक जयंती तक देश की ज्यादातर आबादी की जीवन शैली में सरकार आमूल-चूल परिवर्तन लाएगी। देश के महानगरों ...और पढ़ें

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। आजादी की हीरक जयंती तक देश की ज्यादातर आबादी की जीवन शैली में सरकार आमूल-चूल परिवर्तन लाएगी। देश के महानगरों पर बढ़ते आबादी के बोझ को कम करने और लोगों को बेहतर सुविधा मुहैया कराने के लिए सरकार ने देश में विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस सौ शहर बसाने का निश्चय किया है। शहरों में मिलने वाली सुविधाओं की तर्ज पर गांवों में रहने वाली दो तिहाई आबादी के लिए भी वो सभी मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।
राष्ट्रपति के अभिभाषण में सरकार ने शहर एवं गांव में रहने वालों के जीवन स्तर को सुधारने को प्राथमिकता दी है। ग्रामीण क्षेत्र की ज्यादातर आबादी को स्वच्छ पेयजल और शौचालय तक मुहैया नहीं हो पाता है। आजीविका के लिए उन्हें शहरों की ओर पलायन करना पड़ता है। इन विषम परिस्थितियों से जूझ रही जनता को शहरों जैसी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। राष्ट्रपति के अभिभाषण में इसका विस्तार से जिक्र किया गया है। उनके जीवन स्तर में सुधार के लिए पंचायती राज संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा।
गांव के मूल ढांचे और उनकी प्रकृति से छेड़छाड़ किए बगैर उन्हें शहरों की सभी सुविधाएं मुहैया कराने का संकल्प दिखाया गया है। इससे जहां लोगों के जीवन स्तर में सुधार आएगा, वहीं लोगों का शहरों की ओर होने वाला पलायन रुकेगा। दी जाने वाली सुविधाओं में देश के प्रत्येक परिवार के पास अपना पक्का मकान होगा। जिसमें स्वच्छ पेयजल और शौचालय के साथ बिजली का कनेक्शन होगा। चौबीस घंटे विद्युत आपूर्ति से गरीबों को छोटा-मोटा कारोबार करने का मौका मिलेगा।
'स्वच्छ भारत मिशन' की शुरुआत कर कचरा प्रबंधन और स्वच्छता सुनिश्चित की जाएगी। बापू को उनकी 150वीं जयंती पर वर्ष 2019 में सरकार की ओर से यह श्रद्धाजंलि होगी। लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'पहले शौचालय फिर देवालय' की बात कहते रहे। सरकार में आने के बाद उन्होंने स्वच्छता को खास तरजीह दी है।
