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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 01, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

दृष्टिहीनों की जिंदगी में भर रही उजाला

By Srishti VermaEdited By:
Published: Tue, 01 Aug 2017 09:17 AM (IST)Updated: Tue, 01 Aug 2017 09:25 AM (IST)

उनकी अंधेरी जिंदगी में शिक्षा का उजियारा फैलाने का उनका कारवां शुरू हुआ जो आज उनकी जिंदगी में बदलाव लाने का सबब बन गया।

दृष्टिहीनों की जिंदगी में भर रही उजाला
दृष्टिहीनों की जिंदगी में भर रही उजाला

इलाहाबाद (विमल पांडेय)। अगर हौसला है तो बड़ी से बड़ी डगर भी आसानी से पाई जा सकती है। संगम नगरी इलाहाबाद के टैगोर टाउन की एक साधारण गृहिणी हरदीप कौर के इसी असाधारण हौसले ने ब्रेल लिपि में लेखन कर एक नई क्रांति की नींव रख दी है। ब्रेल लिपि की उनकी किताबों के लिए अब मुफ्त प्रकाशक मिल जाने
से मानो उनकी उम्मीद को मंजिल मिल गई है।

हरदीप कौर के सोचने का नजरिया जरा हटकर था। वह दृष्टिहीनों को देखकर यूं ही बगल से होकर आगे नहीं निकल गईं। दो दशक पहले उनके मन में सवाल उठा कि ये दृष्टिहीन बच्चे क्या सोचते हैं। क्या पढ़ना चाहते हैं? चुनौती थी कि उनके सोचने को कैसे पूरा किया जा सकता है, इसके लिए उन्होंने उनकी जिंदगी में झांकना शुरू किया। उनके स्कूल जाने लगीं। उनकी अंधेरी जिंदगी में शिक्षा का उजियारा फैलाने का उनका कारवां शुरू हुआ जो आज उनकी जिंदगी में बदलाव लाने का सबब बन गया।

ऐसे पाई सफलता की मंजिल : ब्रेल लिपि की पढ़ाई करने वाली हरदीप कौर ने बच्चों की इस इच्छा के अनुसार कि वह क्या पढ़ना चाहते हैं, पुस्तक लिखना शुरू कर दिया। प्रारंभ में अनेक कठिनाई आईं, लेकिन निरंतर अभ्यास ने राह आसान कर दी। उन्होंने 15 पुस्तकें लिखीं हैं, जो बच्चों को पढ़ने के लिए दी गई हैं।

दृष्टिहीनों के लिए खोलेंगी पुस्तकालय: दृष्टिहीन लोगों के लिए इलाहाबाद में एक पुस्तकालय खोलने का सपना संजोने वाली हरदीप कहती हैं वह आम लोगों, शासन-प्रशासन के सहयोग से अपने इस सपने को जल्द ही पूरा करेंगी। हरदीप के इस हौसले को देख यहां की सामाजिक संस्थाओं ने कई पुरस्कार दिए हैं। इनमें लोक उन्नति सम्मान और राज्य स्तरीय सम्मान ‘मैं भी मलाला हूं’ प्रमुख है।

पुस्तकों का कारवां
ब्रेल लिपि में लिखी पुस्तकों में संत कबीर दास के दोहे, नरेंद्र मोदी की जीवनी, हरिवंश राय बच्चन की मधुशाला, वल्र्ड फेमस दस हैंडीकैप लोगों की जीवनी, गीता सार, लुईस ब्रेल की जीवनी, हमारा राष्ट्रगान आदि हैं। हरदीप के इस जुनून पर शहरवासी भी आगे आए। किसी ने कीमती ब्रेल लिपि का टाइपराइटर दिया तो किसी ने सॉफ्टवेयर। अब हरदीप फिर से एक दर्जन पुस्तकें लिखने जा रही हैं। ये पुस्तकें इन दृष्टिहीन बच्चों की इच्छाओं के अनुसार लिखी जा रही हैं।

मुफ्त प्रकाशन का ऑफर
दृष्टिहीन बच्चों के लिए लगातार काम करने वाली हरदीप को मुंबई की एक सामाजिक संस्था एवं प्रेस नेशनल एसोसिएशन आफ ब्लाइंड ने सराहा है। संस्था अब हरदीप की लिखी हर पुस्तक का निशुल्क प्रकाशन करेगी।

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