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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 22, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अगर तीन दिन पहले नहीं हुई होती चूक, तो नहीं होता उड़ी हमला!

By Lalit RaiEdited By:
Published: Thu, 22 Sep 2016 09:23 AM (IST)Updated: Thu, 22 Sep 2016 02:59 PM (IST)

हमारी एक भूल आतंकियों के लिए कितनी मददगार बन जाती है। उड़ी उसका एक उदाहरण है। बताया जा रहा है ...और पढ़ें

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नई दिल्ली। भारत की सुरक्षा एजेंसिया लापरवाह हैं या उनके पास पुख्ता खुफिया जानकारी का अभाव होता है। ये सवाल जेहन में इसलिए बार-बार आते हैं, क्योंकि आतंकी हमलों के बाद सबसे पहली प्रतिक्रिया या जानकारी यही आती है कि सुरक्षा एजेंसियों के पास खुफिया जानकारी थी। ऐसे में जवाब साफ है कि कहीं न कहीं हम चूक जाते हैं। उड़ी हमले के बारे में जो जानकारी सामने आ रही है उसके मुताबिक हमले से तीन दिन पहले ये सूचना मिली थी की उड़ी के सेना मुख्यालय पर लश्कर के आतंकी किसी बड़े हमले को अंजाम देने वाले हैं।

उड़ी के पास LoC पर मौजूद थे आतंकी

एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक 15 सितंबर 2016 को खुफिया एजेंसियों ने जानकारी दी थी कि लश्कर के आठ आतंकी एलओसी पर मौजूद हैं। मौके का फायदा उठाकर आतंकी भारतीय सीमा में दाखिल हो सकते हैं। खुफिया जानकारी में इस बात का भी जिक्र था कि आतंकी उड़ी के सैन्य बेस को निशाना बना सकते हैं।

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28 अगस्त से आतंकी कर रहे थे रेकी

खुफिया अधिकारियों के मुताबिक 28 अगस्त से ही उड़ी की ऊंची चोटियों से लश्कर के इन आठ आतंकियों के साथ दूसरे आतंकी संगठन भी लगातार उड़ी सेना मुख्यालय की लगातार रेकी कर रहे थे। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की पुख्ता जानकारी के बाद सेना मुख्यालय पर हमला होना लापरवाही है। सैन्य मुख्यालय में जिस तरह आतंकी घुसने में कामयाब रहे वो पूरी तरह से लापरवाही को दर्शाता है।

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रक्षा मंत्री ने माना,गड़बड़ी हुई

उड़ी में सेना मुख्यालय पर आतंकी हमले पर रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर ने कहा कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि कुछ गड़बड़ी हुई है। सेना के एक अधिकारी के मुताबिक सैन्य मुख्यालय के बाड़े को दो जगह से काटा गया था। उन्होंने कहा कि बाड़े को दो जगहों पर करीब से काटा जाना और उस पर किसी का निगाह न जाना गंभीर लापरवाही की तरफ इशारा कर रहा है।

विशेषज्ञों ने उठाए सवाल

सुरक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि जिस तरह का माहौल जम्मू-कश्मीर में बना हुआ है। उसमें सैन्य अधिकारियों को खुद ब खुद सतर्क रहना चाहिए था। सैन्य अधिकारी किसी खुफिया जानकारी के मिलने का इंतजार क्यों करते हैं।

18 जवान हुए थे शहीद

गौरतलब है कि उड़ी हमले को पिछले 26 साल में सेना के ठिकाने पर बड़ा हमला बताया जा रहा है। फिदायीन हमले में सेना के 18 जवान शहीद हो गए थे। हालांकि सेना ने चार आतंकियों को भी मार गिराया था।

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