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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 03, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अरुण जेटली के बयान से भड़का चीन, कहा- संप्रभुता की रक्षा के लिए हम हैं तैयार

By Sanjeev TiwariEdited By:
Published: Mon, 03 Jul 2017 02:36 PM (GMT+05:30)Updated: Mon, 03 Jul 2017 08:34 PM (GMT+05:30)

जेटली ने चीन की चेतावनी पर कहा था कि 1962 का भारत और 2017 का भारत अलग।

अरुण जेटली के बयान से भड़का चीन, कहा- संप्रभुता की रक्षा के लिए हम हैं तैयार
अरुण जेटली के बयान से भड़का चीन, कहा- संप्रभुता की रक्षा के लिए हम हैं तैयार

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली । भारत और चीन में सिक्किम से लगी सीमा पर जारी तनातनी के बीच कूटनीतिक जंग तेज हो गई है। रक्षामंत्री अरुण जेटली के बीजिंग की दबंगई का माकूल जवाब देने के बेबाक बयान से बौखलाए चीन ने पलटवार करते हुए कहा कि वह भी 1962 का चीन नहीं है। इतना ही नहीं चीन ने सिक्किम सीमा पर भारतीय सेना की तैनाती को धोखा करार देते हुए भारत से अपने सैनिकों को हटाने की मांग की है। सीमा पर भारतीय सैनिकों की मजबूत तैनाती की बौखलाहट में चीन ने यहां तक कहा है कि अपनी सीमा की रक्षा के लिए युद्ध की नौबत आयी तो वह उसके लिए भी तैयार है। चीन के शब्दों की इस मिसाइल के दबाव में आए बिना भारत ने सिक्किम सीमा पर तैनात अपने सैनिकों को पीछे हटाने का फिलहाल कोई संकेत नहीं दिया है।

चीन ने डोकलाम सीमा पर भारतीय सैनिकों की तैनाती को भी भारत की सभी पिछली सरकारों के रुख से अलग धोखा करार दिया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सोमवार को रक्षा मंत्री अरुण जेटली के बयान पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया में कहा कि भारतीय रक्षा मंत्री ने ठीक कहा है कि यह 1962 का नहीं 2017 का भारत है। तो हम भी 1962 नहीं 2017 के चीन हैं। चीन विदेश मंत्रालय ने इस जवाबी बयान के जरिए भारत के मुकाबले अपनी बड़ी सामरिक और आर्थिक ताकत का संदेश देने की कोशिश की है।

गौरतलब है कि जेटली ने दो दिन पहले डोकलाम सीमा पर तनातनी में चीनी सैनिकों को पीछे धकेलने की भारतीय सैनिकों की कार्रवाई की ओर इशारा करते हुए कहा था कि यह 1962 के युद्ध के समय का नहीं 2017 का भारत है और इस बात को समझना होगा। चीनी विदेश मंत्रालय ने डोकलाम क्षेत्र में भारतीय सैनिकों की तैनाती ब्रिटिश काल में 1890 में हुई संधि का उल्लंघन है। बीजिंग के मुताबिक यह इलाका चीन का है और भारतीय सैनिक यहां घुस आए हैं। इसीलिए भारत इस संधि का पालन करते हुए तत्काल यहां से अपने सैनिकों को हटाए। चीन के मुताबिक सिक्किम क्षेत्र में सीमा निर्धारण पूरी तरह स्पष्ट है और भारत की सभी पूर्व की सरकारों ने इस संधि का पालन किया है। सैनिकों की तैनाती का भारत का रुख उसकी पूर्व की सभी सरकारों के रुख का उल्लंघन है।

चीन ने डोक ला क्षेत्र में अपने सैनिकों की तैनाती के लिए भूटान की आड़ लेने का भी आरोप लगाया। चीनी विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए वह जरूरी कदम उठाएगा। सिक्किम सीमा पर भारत के कड़े तेवरों पर चीनी बौखलाहट का संकेत इससे पहले चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने दे दिया था। इस सीमा विवाद को लेकर प्रकाशित अपने लेख में ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि अपनी सरहदों की रक्षा के लिए युद्ध की हद तक जाने को भी तैयार है। इस अखबार में प्रकाशित लेख को चीन सरकार का नजरिया माना जाता है। इस तल्खी के बीच लेख में दोनों देशों के बीच जंग कह बजाय मसलों को सुलझाने के लिए आपसी बातचीत की पैरोकारी भी की गई है।

साथ ही अमेरिका की तरफ साफ इशारा करते हुए कहा गया है कि दोनों देशों के विवाद में किसी तीसरे को फायदा उठाने का मौका नहीं दिया मिलना चाहिए। इसके लिए भारत को चीन के प्रति अपना नजरिया बदलने की सलाह भी दी गई है। चीन के इन तल्ख बयानों के बावजूद भारत ने अभी तक सिक्किम के डोकलाम में सैनिकों की तैनाती जारी रखने के अपने रुख में किसी तरह के बदलाव का कोई संकेत नहीं दिया है।

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