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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 17, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

केजरी पर केंद्र के हमले से ताकतवर हुए जंग

By Sachin BajpaiEdited By:
Published: Sun, 17 May 2015 10:03 PM (IST)Updated: Sun, 17 May 2015 10:20 PM (IST)

दिल्ली की कार्यवाहक मुख्य सचिव शकुंतला गैमलीन के बहाने सूबे के मुख्यमंत्री पर केंद्र सरकार के तीखे हमले से उपराज्यपाल का पलड़ा भारी हो गया है।

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नई दिल्ली । दिल्ली की कार्यवाहक मुख्य सचिव शकुंतला गैमलीन के बहाने सूबे के मुख्यमंत्री पर केंद्र सरकार के तीखे हमले से उपराज्यपाल का पलड़ा भारी हो गया है। दिल्ली में सरकार पर अधिकार को लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपराज्यपाल नजीब जंग के बीच लगातार बढ़ रहे टकराव के बीच केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरन रिजिजू के ताजा बयान ने स्थिति स्पष्ट कर दी है।

रिजिजू ने कहा कि दिल्ली में अधिकारों के बंटवारे को लेकर विशेष प्रावधान किए गए हैं और उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के अधिकारों का बंटवारा स्पष्ट है। जानकारों का कहना है कि रिजिजू के ताजा बयान से स्पष्ट है कि कार्यवाहक मुख्य सचिव की नियुक्ति के मामले में उपराज्यपाल जंग ने संविधान के अनुरूप काम किया है। संविधान की धारा 239एए में कहा गया है कि उपराज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह से शासन के फैसले लेंगे। अब दोनों पक्ष इसकी अलग-अलग व्याख्या कर रहे हैं। मुख्यमंत्री केजरीवाल और उनकी सरकार के मंत्रियों का यह मानना है कि बगैर मुख्यमंत्री की राय के उपराज्यपाल कोई निर्णय नहीं ले सकते। उपराज्यपाल की ओर से जारी बयान में यहां तक कहा जा चुका है कि वह दिल्ली में भारत की राजसत्ता के प्रतिनिधि हैं और उन्हें फैसले लेने का पूरा अधिकार है।

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